
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़।
हरियाणा प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष मोहनलाल बडौली के विरुद्ध हिमाचल प्रदेश के कसौली क्षेत्र में दर्ज प्राथमिकी को लेकर लोग अपनी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं ।लेकिन इस मामले में बहुत लोगों को प्रथम दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता भी इसे एक राजनीतिक षड्यंत्र के रूप में देख रहे होंगे इसलिए उनके विरुद्ध किसी तरह की किसी कार्रवाई की संभावना नजर नहीं आ रही है। बहुत लोगों ने इस बात को कुछ इस तरह भी प्रस्तुत किया है कि पार्टी ने बहुत पहले सामने आई पूर्व मंत्री संदीप सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के पुत्र से संबंधित इसी तरह की शिकायतों को जिस तरह से निपटा ,मौजूदा प्रकरण में भी पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहेगी। मोहनलाल बडोली को समझने और जानने वाले बहुत कुछ लोगों का मानना है कि यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है। बडौली की पहचान न तो नशेड़ी की है न ही उनकी छवि दागदार है।
उपरोक्त मामले में सह आरोपी बनाए गए रॉकी मित्तल भी एक वीडियो में दावा कर रहे हैं कि न वह खुद शराब पीते हैं न मोहनलाल बडोली शराब पीते हैं। उनकी मांग है कि इस मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
पहले भाजपा में परंतु अब कांग्रेस पार्टी में काम कर रहे गुड़गांव क्षेत्र के वरिष्ठ और जाने-माने नेता जीएल शर्मा ने मोहनलाल बडोली को एक संदेश देते हुए उनका उत्साह बढ़ाया है और उन्हें नैतिक समर्थन देने की बात कही है। उन्होंने श्री बडोली को भेजे अपने संदेश में कहा है कि
भाई साहब
नमस्ते जी
हम सब जानते है कि मामला झूठा है आप अच्छे इन्सान है राजनैतिक छवि भी अच्छी । सबको पता है कि विरोधियों ने उज्जवल भविष्य को रोकने के लिए चाल चली है इसीलिए हिम्मत से काम करते रहिए भगवान आपका साथ देंगे। विचलित नहीं होना है मेरा समर्थन आपके साथ है।
सादर
जी एल शर्मा।
उधर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता और राजनीतिक विचारक शीलक राम हुड्डा ने इस मामले में कहा है कि यह प्रकरण एक सोची समझी योजना के हिस्से की तरह नजर आ रहा है।आम आदमी भी इसे कोल कल्पित मामला मानकर चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकी कानून की नजर में कहीं नहीं ठहरेगी और इतनी कमजोर है कि इसमें पूछताछ करने की जरूरत का भी कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा । उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकी निश्चित तौर पर रद्द होने वाली है। इसमें कोई दम नहीं है। इसे केवल एक साजिश के रूप में ही देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोग यह महसूस कर रहे हैं कि साजिश में शामिल लोगों का मकसद भी प्रदेश अध्यक्ष की छवि धूमिल करने का ही है। शायद उन्होंने इसके लिए दिल्ली में हो रहे विधानसभा के चुनाव के मौके को विशेष तौर पर चुना चुना है और लगभग डेढ़ साल बाद प्राथमिकी दर्ज कराई है।
