
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़।
यह धान की कटाई और झड़ाई का समय है। कुछ किसान यह काम पूरा करके धान के बचे अवशेष पराली को ठिकाने लगाने का एक आसान और प्रचलित तरीका अपनाते हुए पराली के ढेर में आग लगा देते हैं और लंबी तान कर सोते हैं। यह देखा गया है कि कुछ किसान उसी खेत में गेहूं की बिजाई करना चाहते हैं। ऐसे में इस खेत में कटाई के बद बच्चे धान के अवशेष भी जला दिए जाते हैं।
अब सर्दी भी आ रही है और पर्यावरण प्रदूषण के खतरे को अभी से इसलिए महसूस किया जा रहा है कि हर वर्ष दिल्ली और इसके आसपास घना कोहरा छा जाता है और विशेषज्ञ इसके लिए पराली जलाए जाने को जिम्मेदार मानते हैं। हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में किसानों को चेतावनी देने जुर्माना वसूल करने और कानूनी कार्रवाई करने के अपने काम में लगा रहता है ।किसानों को जागरूक करने की कोशिश भी की जाती हैं ।लेकिन यह देखा जा रहा है कि लोग मानते नहीं । आपको बता दें कि हरियाणा के यमुनानगर जिले में खेतों से धान की फसल काटने के बाद अवशेषों में आग लगाने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस बार जिला प्रशासन ने सोच विचार के बाद यह निर्णय लिया है कि पराली जलाने वाले किसानों को अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी उनके प्रति अब कोई नरमी नहीं दिखाई जायेगी। बल्कि सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी ने भी खेत में पराली जलाई तो उसके खिलाफ थाने में सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
जबकि इससे पहले यह व्यवस्था थी कि पराली अवशेषों में आग लगाने पर किसानों पर 2500 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जुर्माना किया जाता था। प्रशासन के अब नए फरमान जारी होने के बाद पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आ सकती है। हालांकि पिछले वर्ष 98 मामले सामने आए थे। जबकि इस बार इन मामलों में काफी कमी आई है।प्रशासन के अनुसार 2500 रुपये जुर्माने का किसानों पर कोई खास असर नहीं हो रहा था। यदि किसी को आग लगाते हुए पकड़ लिया जाता था तो प्रशासन 2500 रुपये जुर्माना लगा देता था। किसान भी बिना विरोध किए इस जुर्माने को अदा कर देते थे।
जिले में अभी तक पराली जलाने के 20 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से ट्रेस हुए 11 मामलों में किसानों पर 27500 रुपये जुर्माना किया गया था। किसानों ने यह सारा जुर्माना अदा भी कर दिया। वहीं पराली जलाने के आरोप में प्रशासन ने इस सीजन में अब तक केवल एक एफआईआर ही दर्ज कराई है।
