
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
चंडीगढ़
छोटा सा प्रदेश हरियाणा अपनी राजनीतिक उठा पटक, अदला-बदली, उतार चढ़ाव तथा सरकार गिराने बनाने के लिए उस समय से ही पूरे देश में विख्यात रहा है जब यह अस्तित्व में आया था । प्रदेश बना तो सरकारें बनने और टूटने का दौर शुरू हो गया था ।साल भीतर राष्ट्रपति शासन लगा, इसी दौरान डीलिमिटेशन हुआ ,बड़े स्तर पर दल बदल हुआ मुख्यमंत्री बदले गए फ्लोर पर सरकारें गिरी। इसी दौर में हरियाणा आया राम गया राम के नाम से बदनाम हुआ। बहुत सी राजनीतिक घटनाएं हरियाणा में हुई। सोमवार को जहां एक तरफ लग रहा था कि बीजेपी जेजेपी के साथ गठबंधन कर रही है तो शाम होते-होते खबरें उड़ी कि बिना जेजेपी के सरकार बन रही है। इसी घटनाक्रम के दृष्टिगत भारतीय जनता पार्टी ने अपने विधायकों के अलावा निर्दलीय विधायकों की बैठक बुला ली है जो अब चंडीगढ़ में शुरू हो गई है। जेजेपी द्वारा भी अपने विधायकों की आपात बैठक बुलाने के समाचार हैं । इस उठा पटक में जेजेपी नेतृत्व इस असमंजस में आकर फंस गया है कि आज मतलब 12 मार्च को बीजेपी से निपटे या 13 मार्च को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अजय चौटाला के जन्मदिन पर आयोजित हिसार की रैली को सफल बनाएं ।
पता चला है कि भारतीय जनता पार्टी ने जेजेपी के नेताओं को गठबंधन नहीं करने का संदेश दे दिया है ।इसके बाद सरकार बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने मंगलवार सुबह 11 बजे सभी भाजपा और निर्दलीय विधायकों की बैठक बुला ली है।उधर जेजेपी ने भी अपने विधायकों की आपात बैठक बुलाई है। इससे ऐसा लगता है कि मनोहर लाल अगले 6 महीने अपनी सरकार निर्दलीय विधायकों के दम पर बनाने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आज की विधायकों की बैठक साधारण बैठक नहीं है बल्कि इसमें बड़ा फैसला दिया जाना है। सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर चुके बलराज कुंडू क्या करेंगे इससे आज ही उनका राजनीतिक भविष्य तय हो जाएगा। शेष सभी निर्दलीय विधायक और गोपाल कांडा पहले ही सरकार के खुले समर्थन में हैं। इसका अर्थ यह है कि लोकसभा के चुनाव के समय हरियाणा में मनोहर सरकार का स्वरूप भी बदल सकता है। वैसे 12 मार्च को जेजेपी के नेता भाजपा के बड़े नेताओं से मिलकर कोई समाधान निकालने की आखरी कोशिश जरूर करेंगे। अब स्थिति साफ हो गई है कि बीजेपी जेजेपी से पिंड छुड़ाना चाहती है और जेजेपी बीजेपी के साथ जुड़े रहना चाहती है। यह भी लगता है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता वैसे ही नहीं कह रहे थे कि भाजपा 10 की 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
इस प्रकरण के अलावा भाजपा की भी अपनी कुछ खबरें हैं। एक यह कि पार्टी ने रोहतक सोनीपत कुरुक्षेत्र अंबाला हिसार में नए चेहरों को चुनाव लड़ाने की योजना बना ली है। रोहतक से बाबा बालक नाथ सोनीपत से डॉक्टर अरविंद शर्मा तथा अंबाला से बंतो कटारिया चुनाव लड़ सकती हैं। कांग्रेस की नेत्री कुमारी शैलजा कहां से चुनाव लड़ेगी, उसे देखते हुए भी भाजपा अंबाला और सिरसा में उम्मीदवार तय कर सकती है। अब लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने बृजेंद्र सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद भी अपनी रणनीति बदलने की कोशिश की है। बीजेपी और निर्दलीय विधायकों की बैठक 11:00 शुरू होगी इस बैठक के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। कई दिन से भारतीय जनता पार्टी के नेता जननायक जनता पार्टी से गठबंधन को लेकर कोई फैसला नहीं कर पा रहे थे अब किसी नेता में उन्हें समझा दिया होगा कि तुमने फैसला नहीं लिया तो जनता फैसला ले लेगी।
