
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2022@gmail.com चण्डीगढ़ हरियाणा में गठबंधन से सरकार चला रहे भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी चुनाव के मामले में भी नजदीक आ रहे हैं और दोनों में पहले लोकसभा में और फिर विधानसभा में गठबंधन के आसार बढ़ते जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता इस समय इंडिया गठबंधन को कमजोर करने और एनडीए के कुनबे को बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं और मकसद है लोकसभा के चुनाव में हैट्रिक लगाना ।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह बात समझने की है कि भारतीय जनता पार्टी ने जिस नीतीश कुमार के लिए सदा के लिए अपने दरवाजे बंद करने की बात कही थी आज फिर उसे एनडीए में शामिल करने की जोरदार कोशिश हो रही है। नीतीश कुमार नौवीं बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाने और एक बार फिर त्यागपत्र देने को तैयार नजर आ रहे हैं ।यह अलग बात है कि उसके सांसद भाजपा के साथ जाने के पक्ष में हैं जबकि विधायक बीजेपी के पक्ष में नजर नहीं आ रहे। इस घटनाक्रम और प्रगति से एक बात साफ है कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा के चुनाव की पूरी तैयारी में तो है ही केंद्र का बजट पारित होने के बाद लोकसभा भंग किए जाने की खबर आ जाए तो यह आश्चर्य नहीं होगा। भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से बने माहौल का लाभ उठाने को तैयार है और प्रधानमंत्री ने बाकायदा उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से चुनाव प्रचार का बिगुल बजा दिया है।

इसी से जुड़ा सवाल हरियाणा का है। एक जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में कई चीजों को तय कर लिया है ।उसमें यह भी है कि हरियाणा में जेजेपी को छोड़कर किसी और दल को साथ लेकर चलना संभव नहीं है। ऐसे में लोकसभा के चुनाव में 10 में से एक सीट जेजेपी के लिए छोड़कर चुनाव लड़ने में कोई बुराई नहीं है। भारतीय जनता पार्टी हरियाणा में कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर दबाव बनाने के लिए किसी जाट नेता पर नजर डालती हैं तो उसे दुष्यंत चौटाला का कोई विकल्प नजर नहीं आता। यहां एक बात और है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल जिन्हें अब चुनाव चुनाव के मामले में भी फ्री हैंड है ने कभी झूठे भी जेजेपी या उसके नेताओं के बारे में कोई नकारात्मक बात आज तक नहीं की है। लोग समझते हैं कि जेजेपी से मुख्यमंत्री मनोहर लाल को कोई दिक्कत नहीं है।

जहां तक विधानसभा चुनाव का सवाल है उस संदर्भ में दोनों दल यह कहकर बात खत्म कर सकते हैं कि जब विधानसभा के चुनाव होंगे तभी इसका फैसला होगा। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की कोशिश तो यह भी बताई गई है कि पंजाब के मामले में यदि शिरोमणि अकाली दल तैयार होता है तो उसे भी एक बार फिर एनडीए का हिस्सा बनाने के प्रयास तेज किए जाएं । बहुजन समाज पार्टी द्वारा बिना गठबंधन के लोकसभा चुनाव की घोषणा करने के बाद जिस तरह से अकाली दल अलग-थलग सा पड़ गया है उसे देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेता मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
इसलिए इन हालातो में भारतीय जनता पार्टी सरकार में सहयोगी जननायक जनता पार्टी को अपने साथ रखने की योजना पर काम कर रही है ,सूत्रों से ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है।
इसकी प्रतिक्रिया भी जानिए।
ऐसा मान कर चलिए कि भारतीय जनता पार्टी और जेजेपी में गठबंधन की खबर के फौरन
बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह के भारतीय जनता पार्टी छोड़ने और उनके इंडियन नेशनल लोकदल के और करीब आने की स्थिति बन जाएगी। चौधरी वीरेंद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि जेजेपी गठबंधन में रही तो वह भारतीय जनता पार्टी में नहीं रहेंगे। ऐसे में उनके सामने दो ही विकल्प हैं एक कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल में जाना या पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के साथ मिलकर राजनीतिक जोर आजमाइश करना। चौधरी वीरेंद्र सिंह जिस कांग्रेस को छोड़कर आए थे उसमें वापस लौटना आसान नहीं है और वह भी तब जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा को फ्री हैंड मिला हुआ है। ऐसे में चौधरी ओमप्रकाश चौटाला और चौधरी वीरेंद्र सिंह दोनों मिलकर भाजपा और जेजेपी को निशाना बनाते हुए हुए गैर भाजपा और गैर कांग्रेस सरकार बनाने की मुहिम में जुटने की कोशिश करेंगे। इंडियन नेशनल लोकदल चौधरी वीरेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में स्वीकार करने को तैयार ही नजर नहीं आ रहा है बल्कि एक तरह से स्वीकार कर चुका है। इससे दोनों को जींद हिसार और सिरसा जिले में लाभ हो सकता है। देखने वाली बात यह है कि हरियाणा को लेकर भारतीय जनता पार्टी गठबंधन का ऐलान चुनाव की घोषणा के बाद करेगी या इससे पहले । जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय सिंह चौटाला का आत्मविश्वास भी बता रहा है कि गठबंधन को लेकर बहुत सी चीजें तय कर ली गई हैं। उनका यह कहना कि गठबंधन लठ की तरह मजबूत है, नई कहानी कह रहा है। डॉ अजय सिंह साफ कर चुके हैं कि कानूनी दिक्कत नहीं हुई तो वह भिवानी से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे और दुष्यंत चौटाला स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका उचाना से ही चुनाव लड़ने का पक्का इरादा है वह उचाना छोड़कर जाने वाले नहीं है।
