
डीडी न्यूज नेटवर्क
जयपुर
राजस्थान में कांग्रेस की हार के लिए कुछ हद तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। उन्होंने पूरे 5 साल अपनी चलाई और मौका आया तो कांग्रेस आलाकमान ही नहीं राहुल गांधी को भी चुनौती देने का काम किया लेकिन मतदाताओं ने उनका घमंड चूर-चूर कर दिया ।उनके 7 सलाहकार भी चुनाव हार गए ।विधानसभा के स्पीकर हार गए, सरकार के मुख्य सचेतक हार गए, उप सचेतक हार गए। उनके अधिकांश मंत्री हार गए इसकी तुलना में सचिन पायलट के ज्यादा समर्थक विधानसभा पहुंचने में सफल हुए। मजे की बात यह है कि उन्हें छोड़कर गए कांग्रेस के कई प्रत्याशी चुनाव हार गए।
एक बात साफ है कि कांग्रेस अब राजस्थान की बागडोर सचिन पायलट को सौंपने का फैसला ले सकती है।लेकिन निवृत्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या तो राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका में आना चाहेंगे या फिर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव बनना चाहेंगे। यद्यपि राहुल गांधी उन्हें रास्ता देते नजर नहीं आ रहे लेकिन पार्टी में गहलोत के बहुत ऐसे समर्थक हैं जो उनकी खुली वकालत करेंगे ।उनके अनुभव का लाभ लेने की बात करके उन्हें समायोजित करने करने की कोशिश करेंगे क्योंकि अशोक गहलोत कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को खुश रखने की सफल कोशिश करते रहे हैं।
