
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
पंचकूला, 25 अगस्त।
इनेलो के प्रदेश कोषाध्यक्ष और पंचकूला शहरी जिलाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने त्योहारों से पहले चीनी के बढ़ते दामों पर चिंता जताते हुए भाजपा सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि सरकार कोई भी वजह बताए, लेकिन जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि त्योहारों के मौसम में चीनी महंगी क्यों हो गई और घरेलू बाजार में पर्याप्त बफर स्टॉक क्यों नहीं रखा गया?
मनोज अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी का औसत खुदरा भाव ₹48.18 प्रति किलोग्राम था, जो 20 अगस्त को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गया। यानी सिर्फ एक महीने में चीनी के दाम करीब 16 प्रतिशत बढ़ गए।
उन्होंने कहा कि सरकार इथेनॉल नीति को चीनी की महंगाई से अलग बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। अगर इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने और चीनी को अलग करने से बाजार में उपलब्धता पर असर नहीं पड़ता, तो सरकार को देश के सामने साफ आंकड़े रखने चाहिए कि पिछले वर्षों में कितनी चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई, इससे बाजार में कितनी चीनी कम हुई और इस सीजन की शुरुआत में स्टॉक पिछले साल के मुकाबले कितना कम है।
उन्होंने कहा कि सरकार के मुताबिक, नए सीजन की शुरुआत में चीनी का स्टॉक करीब 35 लाख टन रह जाने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह लगभग 50 लाख टन था। इसके अलावा, 2025-26 सीजन में करीब 30 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
मनोज अग्रवाल ने पूछा कि जब त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ना पहले से तय था, तो सरकार ने समय रहते पर्याप्त स्टॉक क्यों नहीं रखा?
उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों में मिठाई, हलवाई, बेकरी और खाद्य उद्योग में चीनी की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे समय में चीनी के दाम अचानक बढ़ने का सीधा असर आम परिवार की रसोई और त्योहारों के बजट पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार अब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की घोषणा कर रही है। इससे साफ है कि सरकार घरेलू बाजार में कीमतों और उपलब्धता को लेकर दबाव में है।
“पहले घरेलू नीतियों से बाजार को प्रभावित करना और फिर त्योहारों से पहले आयात के जरिए स्थिति संभालने का दावा करना—यह कैसी आर्थिक नीति है?” मनोज अग्रवाल ने पूछा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को सिर्फ बयान देने के बजाय जनता के सामने ये जानकारी साफ तौर पर रखनी चाहिए:
देश में इस समय चीनी का वास्तविक उपलब्ध स्टॉक कितना है?
पिछले साल के मुकाबले स्टॉक में कितनी कमी आई है?
इथेनॉल उत्पादन के लिए कितनी चीनी और गन्ना डायवर्ट किया गया?
त्योहारों के दौरान चीनी की अतिरिक्त मांग कितनी रहने का अनुमान है?
एक महीने में चीनी के खुदरा दाम इतनी तेजी से क्यों बढ़े?
सरकार को 10 लाख टन चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी?
मनोज अग्रवाल ने कहा कि चीनी सिर्फ बाजार में बिकने वाली चीज नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत है। सरकार की नीतियों का अतिरिक्त बोझ आम लोगों की जेब पर नहीं डाला जा सकता।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार चीनी के स्टॉक, इथेनॉल उत्पादन के लिए किए गए डायवर्जन और चीनी मिलों के पास मौजूद वास्तविक भंडार का जिला-वार और मिल-वार सार्वजनिक आंकड़ा जारी करे, ताकि जनता के सामने पूरी सच्चाई आ सके।
मनोज अग्रवाल ने चेतावनी दी कि अगर त्योहारों के दौरान चीनी के दाम और बढ़े, तो इनेलो सरकार को घेरते हुए जनता की आवाज मजबूती से उठाएगी। भाजपा सरकार को बताना होगा कि किसानों और इथेनॉल उद्योग के हितों के साथ-साथ उपभोक्ताओं की रसोई की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।
