
दक्ष दर्पण
सांपला। सिकर-नरेला पावरग्रिड लाइन के लिए अधिगृहीत जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। रविवार को भैंसरू कलां में किसान यूनियन के साथ हुई बैठक में सांपला मंडल के करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों ने आंदोलन को लेकर बड़ा फैसला लिया। किसानों ने कहा कि अब वे अपने खेतों की खुद रखवाली करेंगे और पावरग्रिड की टावर लगाने वाली टीम को गांव के रास्तों से खेतों तक नहीं पहुंचने देंगे।
किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक मुआवजा निर्धारण में कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज नहीं होता, तब तक प्रशासन से किसी तरह की बातचीत नहीं की जाएगी। किसानों ने गांवों के खेतों के रास्तों पर पक्के धरने शुरू करने का निर्णय लिया है।
कम मुआवजा तय करने का आरोप
मामले में भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा पहले ही उपायुक्त रोहतक को कानूनी नोटिस दे चुका है। 6 अगस्त को दिए नोटिस में आरोप लगाया गया कि पावरग्रिड परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान तत्कालीन एसडीएम सांपला समेत संबंधित अधिकारियों ने वास्तविक बाजार मूल्य से कम दरें तय कीं। आरोप है कि इससे किसानों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ और अधिग्रहण एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचा।
किसानों का आरोप है कि बाजार दर तय करने के लिए बनाई गई कमेटियों, वैल्यूअर की नियुक्ति और मूल्यांकन की प्रक्रिया में प्रभावित किसानों को उचित रूप से शामिल नहीं किया गया। किसानों की आपत्तियों और बाजार भाव से जुड़े दस्तावेजों को भी कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया।
तत्कालीन एसडीएम की भूमिका पर सवाल
कानूनी नोटिस में तत्कालीन एसडीएम सांपला की भूमिका की अलग से जांच की मांग की गई है। मोर्चा का आरोप है कि उनके कार्यकाल में सांपला मंडल के पांच-छह गांवों की जमीन के बाजार भाव तय किए गए। किसानों की आपत्तियों के बावजूद कथित तौर पर दोबारा निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं कराया गया।
मोर्चा ने पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, विवादित बाजार दरों पर रोक, नई मार्केट रेट कमेटियों के गठन और मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
15 दिन में कार्रवाई नहीं तो हाईकोर्ट
किसान संगठन ने प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है। मोर्चा का कहना है कि इस अवधि में कार्रवाई नहीं हुई तो प्रभावित किसानों के साथ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा। किसानों ने कहा कि वे प्रशासन और कानूनी स्तर पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
बैठक में तय हुआ- खेतों में भी रहेगा पहरा
रविवार की बैठक में किसानों ने तय किया कि आंदोलन अब केवल ज्ञापन और अधिकारियों से बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। प्रत्येक गांव के किसान अपने खेतों के रास्तों पर धरना देकर पहरा देंगे। पावरग्रिड की टीम टावर लगाने के लिए पहुंचती है तो किसान उसे खेतों तक नहीं जाने देंगे।
किसानों ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी परियोजना के खिलाफ नहीं, बल्कि जमीन का उचित मुआवजा और कथित गलत प्रक्रिया में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कराने के लिए है।
किसानों के ज्ञापन में प्रमुख मांगें
मुआवजा निर्धारण की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच।
तत्कालीन एसडीएम सांपला समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच।
दोषी अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी व कानूनी कार्रवाई।
विवादित बाजार दरों पर तत्काल रोक।
नई मार्केट रेट कमेटियों का गठन।
जमीन के बाजार मूल्य का नए सिरे से निष्पक्ष निर्धारण।
कम मुआवजा पाने वाले किसानों का पुनर्मूल्यांकन।
लंबित मुआवजा राशि का भुगतान।
वैल्यूअर रिपोर्ट और बाजार दर निर्धारण से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करना।
किसानों की आपत्तियों और दस्तावेजों की दोबारा जांच।
विवाद का समाधान होने तक टावर लगाने का काम रोकना।
