
राजबीर सिंह भारतीय।
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चंडीगढ़।
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर राजबीर सिंह भारतीय (रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट, कार्यालय महाधिवक्ता, हरियाणा) ने गहरा रोष प्रकट किया है। अस्पतालों की लचर व्यवस्था और सरकार द्वारा विशेषज्ञ डॉक्टरों की ‘ठेके’ (कॉन्ट्रैक्ट) पर भर्ती के फैसले को उन्होंने जनहित के साथ खिलवाड़ बताया है।
प्रेस को जारी एक बयान में श्री भारतीय ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए:
1. जिम्मेदारी और जवाबदेही का प्रश्न:
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसा संवेदनशील विभाग, जो सीधे तौर पर मानव जीवन से जुड़ा है, उसे ‘ठेके’ के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। अनुबंध पर रखे गए डॉक्टरों से वह जवाबदेही और समर्पण सुनिश्चित करना कठिन है जो एक स्थाई सरकारी डॉक्टर से अपेक्षित होती है। क्या अस्थाई डॉक्टर मरीजों के प्रति पूरी जिम्मेदारी निभा पाएंगे?
2. उपकरण हैं, पर चलाने वाले नहीं:
अस्पतालों की दुर्दशा पर प्रहार करते हुए श्री भारतीय ने कहा कि कई जगहों पर अल्ट्रासाउंड और अन्य आधुनिक मशीनें तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले विशेषज्ञ और सपोर्टिंग स्टाफ नहीं हैं। यह सरकार की प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है कि करोड़ों के उपकरण धूल फांक रहे हैं और गरीब जनता को मजबूरन निजी क्लीनिकों में जाकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
3. सपोर्टिंग स्टाफ की अनदेखी:
अस्पतालों में केवल विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि नर्स, लैब टेक्नीशियन और अन्य सहायक स्टाफ की भी भारी कमी है। बिना पर्याप्त सपोर्टिंग स्टाफ के विशेषज्ञ डॉक्टर भी प्रभावी ढंग से अपनी सेवाएं नहीं दे सकते।
4. आम जनमानस पर आर्थिक बोझ:
सरकारी व्यवस्था फेल होने के कारण मरीजों को दिल्ली या चंडीगढ़ के बड़े अस्पतालों की ओर भागना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश के हर जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थाई नियुक्ति होनी चाहिए ताकि गरीब मरीजों को अपने ही क्षेत्र में उचित इलाज मिल सके।
सरकार से मांग:
राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य सेवाओं में ‘ठेका प्रथा’ को बंद कर तुरंत स्थाई और नियमित नियुक्तियां की जाएं। साथ ही, बंद पड़े मेडिकल उपकरणों को सुचारू रूप से चलाने के लिए तकनीकी स्टाफ की भर्ती युद्ध स्तर पर की जाए ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
