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धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
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नई दिल्ली।
पूर्व उप प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल के जन्म दिवस के अवसर पर इंडियन नेशनल लोकतंत्र द्वारा आयोजित की जा रही प्रदेश स्तरीय रैली की तैयारी जोरों पर है और अनुमान लगाए जा रहे हैं कि इस बार यह सम्मान दिवस बेशक स्वर्गीय चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के बिना मनाया जा रहा है लेकिन रिकॉर्ड तोड़ हाजिरी के पक्के आसार अभी से नजर आने लगे हैं। पर्यवेक्षक एक बात को राजनीतिक तौर पर उपयुक्त मान रहे हैं कि अभय सिंह चौटाला ने कहो या पार्टी ने इस बार रैली के लिए उपयुक्त स्थान के रूप में रोहतक का चुनाव किया है। इस समय कांग्रेस के नेता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा जेजेपी के नेता अभय सिंह चौटाला के निशाने पर हैं और रोहतक भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गृह जिला है तो जेजेपी ने अपना प्रदेश कार्यालय रोहतक में बना रखा है । ऐसे में दोनों को चुनौती देने की बात कही जा सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल चौधरी भजनलाल भी जब कांग्रेस से अलग हुए तो उन्होंने रैली के लिए रोहतक को ही चुना था। इंडियन नेशनल लोकदल के रोहतक में रैली आयोजित करने के सवाल पर कांग्रेस के नेता और सांसद दीपेंद्र हुड्डा का वह बयान साबित करता है कि रोहतक के निर्णय को लेकर वह भी विचलित हैं ।एक बयान में उन्होंने कहा कि अभय सिंह चौटाला ने कुरुक्षेत्र ,करनाल छोड़कर रोहतक में इसलिए रैली की है कि वह हम पर निशाना साध रहे हैं।
रोहतक में रैली के लिए आवागमन में कोई दिक्कत आने वाली नहीं है ।इसलिए रिकॉर्ड तोड़ हाजरी के आसार बताए जा रहे हैं। अगर राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो इस रैली में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी कोई अड़ंगा अड़ाने की कोशिश नहीं करेगी।
उधर पूरे हरियाणा में किसान वर्ग के लोग विशेष कर जाटों के मन मस्तिष्क में एक विचार बार-बार कौंध रहा है कि क्या पूर्व उपराष्ट्रपति और चौधरी देवीलाल के अनुयाई जगदीप धनखड़ को इस रैली में शिरकत नहीं करनी चाहिए। जगदीप धनखड़ ने अपने आरंभिक राजनीतिक जीवन के समय 1987 में जींद चौधरी देवीलाल के नेतृत्व में आयोजित समस्त हरियाणा रैली में बढ़ चढ़कर भाग लिया था। उनके नेतृत्व में राजस्थान से बहुत लोग जींद पहुंचे थे। श्री धनखड़ आरंभ से चौधरी देवीलाल के परिवार से जुड़े रहे हैं श्री धनखड़ को चौधरी देवीलाल ने कई बार राजनीतिक तौर पर मजबूत किया उन्हें सांसद और केंद्रीय में मंत्री बनवाने में चौधरी देवीलाल के योगदान को कौन भूल सकता है। किसान वर्ग के लोग श्री धनखड़ से सच्चाई जानना चाहते हैं कि उन्होंने इस अप्रत्याशित तरीके से त्यागपत्र क्यों दिया और वह अब चुप क्यों हैं। श्री धनखड़ रैली में आएंगे या नहीं लेकिन लोग उनसे कुछ सवाल जरूर पूछना चाहते हैं। अच्छा हो कि वह खुद ही सारी बातें सार्वजनिक कर दें।
इसमें कोई दो राय नहीं कि जगदीप धनखड़ इस कार्यक्रम में शामिल हो गए तो रैली मैं निश्चित तौर पर चार चांद लग जाएंगे और रोहतक यूपी और राजस्थान के किसानों के लिए भी ऐतिहासिक गंतव्य बन जाएगा। वह आए तो फिर यह भी निश्चित है कि उपरोक्त मामले में कुछ रहस्य उद्घाटन जरूर होंगे। लेकिन आसार यह बता रहे हैं कि धनखड़ का रोहतक आना मुश्किल है। एक तो वह दबाव में दिख रहे हैं दूसरे क्योंकि श्री धनखड़ अभय सिंह और अजय सिंह के परिवारों के बीच में तालमेल और समन्वय बनाने की कोशिश करते नजर आते हैं वह दोनों का ख्याल करते भी दिखते हैं ।बेशक वह इस समय अभय सिंह चौटाला के फार्म हाउस हाउस में रह रहे हैं और कार्यक्रम चौधरी स्वर्गीय चौधरी देवीलाल के नाम का है उनके जन्मदिवस का है परंतु लेकिन लगता नहीं कि वह अभी अजय सिंह चौटाला से कोई नाराजगी मोल लेने का जोखिम मोल ले पाएंगे। अभय सिंह चौटाला ने बताया था कि पिछले दिनों वह श्री धनखड़ से मिले थे परंतु रैली में उनके आने न आने के बारे में कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आई।
हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल और जेजेपी की तुलना करें तो लोगों को इंडियन नेशनल लोकदल की चढ़ती कला नजर आ रही है । लेकिन बता दें कि श्री धनखड़ की इस समय की खामोशी इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त है कि वह आर पार की लड़ाई लड़ने के मूड में ही नहीं है ।ऐसे में रैली में आने के आसार नजर नहीं आ रहे। लेकिन यह भी सच्चाई है कि अभय सिंह या पार्टी के नेता उन्हें रैली में शामिल होने को तैयार करने में सफल हो गए तो इसका हरियाणा ही नहीं उत्तर भारत में बड़ा राजनीतिक संदेश जाएगा और इससे देश की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है।
अंत में यह कहा जा सकता है कि भारतवर्ष का इतिहास यह बताता है कि सफल राजनीतिक लोगों की दो पहचान विशेष तौर पर रही हैं। -एक लोगों के बीच में रहने की प्रवृत्ति और दूसरी आर पार का फैसला लेने की हिम्मत।
