
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चंडीगढ़, 18 अक्टूबर 2026।
ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी यदि वंचित वर्गों को समान अवसर और उचित प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो व्यवस्था को इसका जवाब देना चाहिए।

राजबीर सिंह भारतीय इंदिरा कॉलोनी मनीमाजरा सैक्टर 13 चंडीगढ़ में आरक्षण बचाओ अभियान में एक मिटिंग को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश आजाद है, हमारा अपना संविधान है और संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता एवं गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है। इसके बावजूद सवाल उठता है कि आखिर ऐसी कौन-सी बाधाएं हैं, जिनके कारण समाज के वंचित वर्गों को आज भी आरक्षण और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी पड़ रही है?
उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की दया या खैरात नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक असमानता को दूर करने और वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार तथा प्रतिनिधित्व में अवसर उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण संवैधानिक माध्यम है। डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के सामाजिक न्याय और समानता के विचारों को वास्तविकता में बदलने के लिए अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है।
सुनील पारखी ने कहा कि आरक्षण पर चर्चा करते समय समाज के उन वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है, जो लंबे समय तक शिक्षा और विकास के अवसरों से वंचित रहे हैं। सामाजिक न्याय का उद्देश्य किसी के अधिकारों को छीनना नहीं, बल्कि सभी वर्गों को आगे बढ़ने के उचित अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
एडवोकेट राजेन्द्र मकवाना ने कहा कि भारतीय संविधान समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है। आरक्षण की व्यवस्था को समझने के लिए उसके संवैधानिक उद्देश्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखना जरूरी है। सरकारी विभागों में रिक्त पदों, आरक्षित पदों के बैकलॉग और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि पात्र लोगों को उनके अधिकारों का वास्तविक लाभ मिल सके।
आयोजक राज सिंह ने कहा कि वंचित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। समाज को शिक्षित, जागरूक और संगठित होकर संविधान में दिए गए अधिकारों की जानकारी हासिल करनी चाहिए। उन्होंने सामाजिक न्याय के उद्देश्य को आगे बढ़ाने और सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
राजबीर सिंह भारतीय ने सरकारी नौकरियों में सीमित भर्ती, रिक्त पदों, आरक्षित पदों के बैकलॉग और रोजगार के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब सरकारी रोजगार के अवसर सीमित होते जाएंगे, तो आरक्षण का वास्तविक लाभ पात्र युवाओं तक पहुंचाने की चुनौती भी बढ़ेगी। उन्होंने निजी क्षेत्र में पारदर्शी भर्ती, भेदभाव से सुरक्षा और वंचित समाज के युवाओं को समान अवसर देने के उपायों पर भी गंभीर चर्चा की मांग की।
उन्होंने धार्मिक एवं अन्य संस्थानों में प्रतिनिधित्व के सवाल पर कहा कि जहां प्रशासनिक पदों, नियुक्तियों और प्रबंधन की व्यवस्था है, वहां पारदर्शिता, समावेशिता और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी पर चर्चा होनी चाहिए। यह सवाल किसी धर्म या आस्था के विरोध में नहीं, बल्कि समान अवसर और सामाजिक न्याय की भावना से उठाया जाना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार और व्यवस्था से सवाल किया कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों तथा आरक्षित पदों के बैकलॉग की स्थिति क्या है? भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं? रोजगार के नए अवसरों में सभी वर्गों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
उन्होंने कहा कि आरक्षण पर बहस को विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच टकराव का विषय बनाने के बजाय संविधान, तथ्यों और सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए तथा किसी भी व्यक्ति के साथ सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा, “आज सवाल किसी एक व्यक्ति या वर्ग से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से है—जब देश आजाद है, संविधान हमारा अपना है और समानता हमारा संवैधानिक अधिकार है, तो फिर आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमें आरक्षण और उचित प्रतिनिधित्व की मांग क्यों करनी पड़ रही है? सिस्टम को इसका जवाब देना चाहिए।”
उन्होंने मांग की कि सरकारी भर्तियों और आरक्षित पदों की स्थिति सार्वजनिक की जाए, बैकलॉग दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं तथा शिक्षा, रोजगार और संस्थागत प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीतियां लागू की जाएं।
इस मौके पर राजेंद कुमार टोनी, मन्दिर प्रधान राजेन्द्र सिंह। जयभगवान साहिल चांवर रोकी, बिजेन्द्र कुमार बनारसी औमपरकाश, शिशपाल व अन्य गणमान्य बुद्धिजीवी वर्ग के लोग उपस्थित रहे।
जारीकर्ता
राजबीर सिंह भारतीय
अध्यक्ष ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा रजि चंडीगढ़ प्रदेश ।
