
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़ । पूर्व सीपीएस और भाजपा नेता राजकुमार वाल्मीकि ने
मीडिया के समक्ष कहा
कि यदि नरेश शास्त्री समाज को गुमराह नहीं करते तो आज मेरे समाज को तीन जाने नहीं गंवानी पड़ती
मैंने उनके साथ मीटिंग मे उनकी सभी 12 मांगों को मुख्यमंत्री जी के साथ बात करके सहमत करवाया दिया था पर वह किसी और के इसारे पर नाच रहा था जबकि 6800 पक्के कर्मचारी की भर्ती उनके मांग पत्र में नहीं थी मैंने मुख्यमंत्री जी को उसके लिए भी सहमत करवा दिया था।
और ऐसा व्यक्ति हमारे समाज के सम्मानित मंत्री जी के हाथों मिठाई खाने का हकदार तो कतई नहीं था उसी की गलत नीतियों के कारण आंदोलन लंबा चला जिससे मेरे समाज की बहन बेटियों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ा मानते हैं की संविधान कर्मचारियों और अधिकारियों को सीमित अधिकार क्षेत्र में रहकर संघर्ष और आंदोलन करने की इजाजत देता है लेकिन नरेश शास्त्री जी तो मानो विपक्ष की भूमिका निभा रहे हो इस प्रकार एग्रेसिव होकर आंदोलन कर रहा था जो की समाज के लिए और कर्मचारी का हितैषी कदापि नहीं हो सकता
