
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़।हरियाणा सरकार में पूर्व सीपीएस राजकुमार वाल्मीकि ने कहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हरियाणा के सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर चिंतित हैं और कर्मचारियों को उनका हक देने को तैयार हैं लेकिन दिक्कत यह है कि आंदोलन को कुछ आंदोलन जीवी, स्वार्थी और पेशेवर लोग अपनी मुट्ठी में करना चाहते हैं और इसका लाभ उठाने की फिराक में है ।उन्होंने एक बयान में कहा कि कर्मचारियों को यह समझ लेना चाहिए कि विपक्ष भी उनके कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की कोशिश में है।
श्री वाल्मीकि ने कहा कि यह बात शीशे की तरह साफ है कि जो पेशेवर लोग इस आंदोलन की आड़ में अपना स्वार्थ पूरा करना चाहते हैं वही इस हड़ताल के समाप्त होने हक में नहीं है। जब भी बात सिरे चढ़ती है यही लोग बेहूदी शर्तें बीच में लाकर मामले को खराब कर देते हैं। उन्होंने कहा कि स्वार्थ पूर्ति में लगे एक नेता ने अथाह धन इकट्ठा कर रखा है सरकार को उसकी जांच करानी चाहिए ।
राजकुमार वाल्मीकि अपने युवा समर्थकों के साथ पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के पदाधिकारी नरेश शास्त्री को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि नरेश शास्त्री सफाई कर्मचारियों के दम पर अग्निशमन कर्मियों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस हड़ताल का फायदा दिलवाना चाहते है और इस हड़ताल का फायदा उठाते हुए वह अग्निशमन कर्मियों को उनकी सेवा दौरान मृत्यु पर 50 लाख मुआवजा की मांग कर रहे है और सफाई कर्मी की सेवा दौरान मृत्यु पर सिर्फ 20 लाख की मांग कर रहे है जो न्याय संगत नहीं है। ज्ञात रहे नरेश शास्त्री अपने इस आंदोलन में वाल्मीकि समाज के नेताओ और प्रबुद्ध लोगों को भी लपेटने का काम कर रहे है जिसका हरियाणा का वाल्मीकि समाज विरोध करता है। उन्होंने कहा कि नरेश शास्त्री वाल्मीकि समाज के दम पर हरियाणा सरकार को नीचा दिखाना चाहता है। उन्होंने कहा कि वह इस बात के पक्ष में भी है कि सरकार हरियाणा के प्रबुद्ध वाल्मीकि नेतागण और सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की ड्यूटी लगाये तो इस समाज को सरेआम बेचने वाले नरेश शास्त्री की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी और यह आंदोलन शांतिपूर्वक बातचीत के माध्यम से समाप्त हो जायेगा। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के 6800 पद खाली है सरकार इनकी भर्ती को भी तैयार है परंतु कर्मचारियों के हितों को बेचने वाले लोग नहीं चाहते कि इस तरह से भी समाज का भला हो। श्री वाल्मीकि ने कहा कि मंगलवार की पिछली बैठक में अधिकारियों के विरोध के बावजूद उनके अनुरोध पर नरेश शास्त्री को बैठक में बुलाया गया था परंतु उनका मकसद मामले को खराब करना और अपना स्वार्थ पूरा करना था। वह मीटिंग बीच में ही छोड़कर चले गए और नारेबाजी पर उतर आए। यही काम वह चार-पांच बार पहले भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को नरेश शास्त्री जैसे व्यक्ति की असलियत जाननी होगी। उन्होंने कहा कि वह हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों के सूझबूझ रखने वाले प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री से मिलवाने को तैयार हैं परंतु उस दल में शास्त्री जैसे लोगों को अहमियत नहीं मिलेगी। श्री वाल्मीकि ने कहा कि नरेश शास्त्री के लेटर हेड पर जो मांग पत्र दिया गया है उसमें सफाई कर्मचारियों को पक्का करने की मांग ही नहीं की गई है लेकिन उनकी कोशिश है कि सफाई कर्मचारियों की यह मांग भी पूरी हो । उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को स्वार्थी नेताओं के चंगुल से बाहर आना चाहिए। जिस दिन यह कोशिश सफल हो जाएगी उसी दिन उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
