
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़।
वैसे तो गठबंधन के फैसले चुनाव की घोषणा के बाद और बहुत ही योजनाबद्ध और सावधानी से होते है परंतु इस मामले में चर्चाओं का बाजार बहुत पहले ही गर्म हो जाता है। पंजाब का चुनाव 2027 फरवरी महीने में होने निश्चित है लेकिन कुछ लोग यह मानकर भी चल रहे हैं कि यह चुनाव इसी वर्ष नवंबर दिसंबर में भी हो सकते हैं। पंजाब के चुनाव को लेकर कई चीज स्पष्ट है ।अभी यह दर्शाया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी अकेले दम पर सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़नें जा रही है और इस चुनाव की बागडोर भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संभाल रखी है। शायद उन्हीं के निर्देश पर पंजाब चुनाव के लिए हरियाणा को लांचिंग पैड के रूप में प्रयुक्त किया जा रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी न केवल हर शनिवार और रविवार को पंजाब के दौरे कर रहे हैं बल्कि पंजाब की जनता और नेताओं से अपने चंडीगढ़ निवास पर भी भेंट कर रहे हैं। पंजाब में भाजपा के लिए खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन उसके नेता जिन कूटनीतिओ को लेकर चुनाव में जुटे हुए ए हैं उससे सत्ता में बैठे आम आदमी पार्टी के नेता पूरी तरह से सचेत हैं। परंतु वह यह जरूर जानना चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी वास्तव में अकेले चुनाव लड़ेगी या फिर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा मिलकर मैदान में उतरेगी। यह सवाल आम आदमी का भी है।
आपको मानना पड़ेगा कि राजनीति में जो कहा जाता है कई बार होता नहीं हैऔर जो होता है वह कहा नहीं जाता है। केंद्रीय मंत्री गृहमंत्री अमित शाह जब पंजाब के दौरे पर आए तो उन्होंने मंच
से यह साफ कर दिया था कि हम अकेले चुनाव लड़ेंगे सभी सीटों पर लड़ेंगे।
लेकिन पिछले दिनों शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर बादल दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर आए हैं। इस मुलाकात को पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि भाजपा ने इस बारे में मुंह नहीं खोला है । पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष पंजाब होकर गए तो उन्होंने भी इस बारे में कोई बात नहीं की ।
परंतु सुखवीर बादल की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने एक बैठक में उत्साहित होकर जब यह कहा कि कार्यकर्ताओं के लिए एक अच्छी और बड़ी खबर आने वाली है तो इस विचार को बल मिला है कि चुनाव में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन के साथ मैदान में आ सकते हैं।
यहां एक फर्क और है कि पहले जहां पंजाब में इस गठबंधन में शिरोमणि अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में होता था अब ऐसा होता नजर नहीं आ रहा। बल्कि गठबंधन हुआ तो भाजपा न केवल बड़ी भूमिका में नजर आएगी बल्कि अकाली दल को 117 में से 50 सीटों पर चुनाव लड़ने को भी मजबूर किया जा सकता है।
भाजपा कैलकुलेटिव नेताओं का दल है ।
उसके नेता हर काम को योजनाबद्ध तरीके से करते हैं।आज शिरोमणि अकाली दल की स्थिति भाजपा नेताओं के सामने है और वह उन परिस्थितियों का लाभ उठाने से चूकेंगे नहीं।
जानकार एक बात का दावा कर रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नेता पंजाब में अकाली दल से गठबंधन नहीं करेंगे । उनकी तैयारी सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की है और अमित शाह चाहते हैं कि सभी दल अकेले चुनाव लड़े। भारतीय जनता पार्टी न केवल हिंदू वोट पर फोकस करेगी बल्कि जट्ट सिक्ख मतदाताओं के डिवीजन का लाभ भी लेना चाहेगी ।
यह बात शीशे की तरह साफ है कि सिक्ख मतदाता जो भाजपा के धुर विरोधी हैं वह आम आदमी पार्टी, कांग्रेस
शिरोमणि अकाली दल, अकाली दल वारिस पंजाब दे में चार जगह बट जाएंगे।
भारतीय जनता पार्टी के नेता इसी कड़ी में पंजाब की राजनीति में निर्णायक धार्मिक डेरों में भी अपना हस्तक्षेप बढ़ा रहे हैं।
हरियाणा की जनता को समझ लेना चाहिए कि 2014 में भाजपा ने जिस तरह हरियाणा में योजना बना कर सरकार बनाई थी ,पंजाब में भी उसी पैटर्न पर काम चल रहा है ।अभी चुनाव के समय भाजपा के नेता आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल कराने और टिकट वितरण के समय बागी उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़ा करने उन्हें सपोर्ट करने की एक व्यवहारिक योजना को भी मूर्त रूप देते नजर आएं तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
विशेषज्ञों में बहुत लोगों का यह मानना है कि भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दाल से गठबंधन करके पंजाब में सरकार में बैठी आम आदमी पार्टी को मजबूत करने की गलती नहीं करेगी। माना जा रहा है कि जैसे ही अकाली दल और भाजपा की गठबंधन की खबर आएगी उसका जट्ट-सिक्ख मतदाताओं में जो रिएक्शन होगा, उससे आम आदमी पार्टी को घर बैठे मजबूती मिल सकती है। इसलिए इस बात की संभावनाएं कम है कि भाजपा अकाली दल को साथ लेकर चुनाव में उतरेगी ।
हां एक बात जरूर है कि केंद्र में प्रस्तावित मंत्रिमंडल फेरबदल के समय यदि शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र सांसद हरसिमरत कौर बादल को फिर से मंत्री बनाया गया तो फिर यह निश्चित हो जाएगा कि भाजपा अकाली मिलकर चुनाव लड़ेंगे।
