
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
10 फरवरी 2026 ।
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि भारत में लोकतंत्र अब मरणासन में पहुंच चुका है और संघी फासीजम पूर्णतया लागू हो चुका है। अभिव्यक्ति की स्वतत्रंता पर अप्रत्यक्ष रूप से पहरा लग चुका है, मीडिया भाजपा-संघ का दास बन चुका है। विद्रोही ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे बडी मंदिर व जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक संसद है। जब संसद में ही नियमों व रूलिंग के बहाने विपक्ष के नेता को बोलने नही दिया जायेगा तब भारत में लोकतंत्र बचा कहां है? भारत के लोकतंत्र की परम्पराओं, मर्यादाओं अनुसार लोकसभा में प्रधानमंत्री व विपक्ष के नेता को विशेष अधिकार है कि वे जब चाहे तब राष्ट्र से जुडा कोई भी मुद्दा उठा सकते है और लोकसभा स्पीकर ऐसा करने की उन्हे अनिवार्य रूप से मंजूरी देंगे। लेकिन लोकसभा स्पीकर संघी कठपुतली बनकर प्रधानमंत्री को तो ऐसा अवसर दे रहे है और विपक्ष के नेता पर नियमों व रूलिंग का बहाना बनाकर पहरा बैठा रहे है। लोकसभा स्पीकर व मोदी-भाजपा-संघ का ऐसा रवैया घोर अलोकतांत्रिक व संवैद्यानिक परम्पराओं के विपरित है। विद्रोही ने कहा कि जब लोकतंत्र के सबसे बडे मंदिर संसद में ही विपक्ष के नेता के अधिकारों का हनन करके उनकी आवाज को कुचला, दबाया जा रहा है तो फिर भारत में लोकतंत्र कहां है? यह अप्रत्यक्ष तानाशाही, आपातकाल व संघी फासीजम नही तो और क्या है? मीडिया पर पूर्णतया सरकार का नियमंत्र हो चुका है। मीडिया में झूठी खबरे मोदी-भाजपा-संघ परोसकर विपक्ष के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है। प्रिंट व इलैक्ट्रोनिक मीडिया में विपक्ष की आवाज की नाममात्र की करवेज होती है और जो करवेज होती है, वह भी नकारात्मक होती है। मीडिया संघी रिसाला बन गया जहां विपक्ष व स्वस्थ लोकतंत्र की आवाज के लिए कोई स्थान नही है। विद्रोही ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंधा, बहरा व गूंगा बन चुका है तभी उसे एक मुख्यमंत्री की हेट स्पीच न सुनाई देती है और न दिखाई। सुप्रीम कोर्टके सभी नियम भी विपक्ष पर लागू हो रहे है। लोकसभा स्पीकर सरेआम झूठ बोलकर महिला सांसदों पर प्रधानमंत्री मोदी पर हमले का षडयंत्र रचने का आरोप लगाकर अनैतिकता व बेशर्मी की सभी हदे पार कर चुके है। ऐसी स्थिति में भारत में लोकतंत्र संविधान को बचाने यदि आमजनों ने संघी फासीजम के खिलाफ सडकों पर लडाई नही लडी तो भारत में लोकतंत्र व संविधान केवल कागजों में रह जायेगा।
10 फरवरी 2026
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रसिद्ध किसान नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजेश पालयट जी की जयंती पर शत-शत नमन किया। विद्रोही ने कहा कि राजेश पायलट जी अल्पायु में ही इस नश्वर संसार से चले गए थे। पर जितने दिन भी वे जीये बड़ी बेबाकी से किसान व गांव की आवाज पार्टी लाईन से ऊपर उठकर उठाते रहे। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे राजेश पायलट जी ने जो कुछ पाया, वह अपनी मेहनत के बल पाया। विद्रोही ने कहा कि किसान हित में उनके द्वारा उठाई गई आवाज व लड़ाई आज भी हमारे लिए प्ररेणा का स्त्रोत है।
