
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
नई दिल्ली ।
थोड़े से दिन बाद हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही है। इनका चुनाव मार्च के बाद किसी भी समय संभव है। जो सांसद राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं वे हैं रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी।
अब स्थिति यह है कि चुनाव में जहां भाजपा अपना एक सांसद बनाने की स्थिति में है वही स्थिति कांग्रेस की भी है। यदि आप भाजपा की जुगाड़ की राजनीति की बात करें तो लगता है अब यह काम नहीं कर पाएगी क्योंकि उसे एक के स्थान पर दो सांसद बनाने के लिए कम से कम सात विधायकों को तोड़ कर लाना होगा यह संभव नहीं तो कठिन जरूर है। इसलिए गुंजाइश नजर नहीं आ रही और लगता यह है कि भाजपा एक ही व्यक्ति को राज्यसभा भेज पाएगी। उम्मीदवार कौन-कौन है इसकी चर्चा से पहले एक जानकारी और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि भाजपा के जो दो सांसद रिटायर हो रहे हैं वह दोनों फिर से राज्यसभा जाने की योजना पर काम कर रहे बताए गए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों लाबिंग करने में लगे हुए हैं और दिल्ली से चंडीगढ़ के चक्कर भी खूब लगा रहे हैं । पहली बात तो यह कि इसकी कोई संभावना नजर नहीं आ रही । भाजपा के लोग बहुत ही कैलकुलेटिव तरीके से राजनीति करते हैं। लेकिन राजनीति में कब क्या हो जाए कहा भी नहीं जा सकता। भाजपा में तो मनोहर लाल जैसे ऐसे भी नेता हैं जो किसी बात को एक बार ठान लें तो उसे पूरा करने के लिए उसके पीछे हाथ धोकर पड़ जाते हैं। अब देखते हैं कि भाजपा राज्यसभा में किसके नाम पर मोहर लगाएगी लेकिन इसी कड़ी में कांग्रेस की भी बात करें तो स्थिति थोड़ी और भी जटिल नजर आ रही है। कुछ लोग यह कयास लगने लगे हैं कि राहुल गांधी की पहल पर पूर्व सांसद डा अशोक तंवर को राज्यसभा में भेजा जा सकता है परंतु भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा के समर्थक अब से पहले यह प्रचार कर रहे हैं कि हुड्डा साहब ने तो पार्टी के समक्ष तीन बातें प्रमुखता से रखनी है। एक यह कि किसी आउटसाइडर को उम्मीदवार न बनाया जाए । यह कि किसी रविदासी को भी उम्मीदवार न बनाया जाए । यह कि जाट को भी राज्यसभा भेजने की जरूरत नहीं है। ऐसे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कई विरोधी निपट जाएंगे। इन में डा अशोक तंवर भी शामिल है। किसी रविदासी को राज्यसभा न भेजने के पीछे हुड्डा विशेष कर दीपेंद्र हुड्डा का तर्क यह है कि हरियाणा में लोकसभा दोनों रिजर्व सीटों के सांसद रविदासी समाज से ही है। ऐसे में राज्यसभा में भी किसी रविदासी को भेजने का कोई औचित्य नहीं है। श्री हुड्डा किसी जाट को इसलिए नहीं भेजना चाहेंगे कि राजनीति में इस तरह के दावपेच भी खेले जाते हैं।
पिछड़ों का नंबर इसलिए नहीं आएगा कि पार्टी ने एक ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है। फिर तो पंजाबी और अग्रवाल मुख्य तौर पर बच गए। लेकिन लगता यह है कि राज्यसभा चुनाव के मामले में हरियाणा में वही होगा जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा चाहेंगे ।पार्टी उनकी बात शुरू में ही मान ले या अंतिम दौर में। कहते हैं होगा वही जो हुड्डा चाहेंगे ।उसके दो कारण है एक यह की हरियाणा में अधिकांश विधायक उन्हीं के समर्थक हैं। दूसरी हैं उनकी मजबूत इच्छा शक्ति और राजनीतिक सोच ।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस मामले में बहुत बड़े खिलाड़ी हैं और उन्हें जानने और समझने वाले लोग हमेशा एक बात कहते हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा जो ठान लेते हैं उसे हासिल करके ही दम लेते हैं। राज्यसभा चुनाव में एक बार फिर वह अपना जलवा दिखा सकते हैं। वह खुद को पार्टी में तो महत्व्पूर्ण और निर्णायक साबित करने के लिए कुछ न कुछ नया करते रहते हैं पार्टी में ही अपने विरोधियों को आईना दिखाते रहते हैं।
पिछले दिनों लंच के नाम पर ही सही, उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को अपने सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा के सरकारी आवास पर बुलाकर एक संदेश देने की कोशिश की है।
यह भी संभव है कि उम्मीदवारी में कांग्रेस की तरफ से किसी महिला का नाम भी आगे कर दिया जाए। वह कौन होगी ,अभी नहीं कहा जा सकता।
हरियाणा में राज्यसभा के चुनाव में कई बार विधानसभा के अंदर की कार्रवाई चर्चा का विषय बनती रही है ।
यहां क्रॉस वोटिंग की खबरें भी साया हुई है। कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा के समर्थन में वोट डालकर दल बदल किया है। वोट डालते वक्त पेन बदले हैं खुद अपनी वोट कैंसिल कराई है। अब इस चुनाव का लोगों को फिर से इंतजार है। वह जानना चाहते हैं कि कांग्रेस क्या करेगी और भाजपा किसके नाम पर अंतिम मोहर लगाएगी। यह पक्का लग रहा है कि भाजपा का उम्मीदवार भी कोई नया व्यक्ति ही होगा। वह स्थानीय भी हो सकता है बाहरी भी कोई आम उम्मीदवार भी हो सकता है भारी भी।
अग्रवाल समाज पंजाबी समुदाय में कांग्रेस के पास अनेकों उम्मीदवार हैं किसी ब्राह्मण का नाम भी आगे किया जा सकता है। इन परिस्थितियों में कुमारी शैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और कांग्रेस हाई कमान एक पत्रकार वह भी ब्राह्मण को राज्यसभा भेजने की योजना पर आगे आ सकते हैं । इसमें गांधी परिवार का एक भरोसेमंद नेता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार प्रख्यात पत्रकार जगजीत शर्मा भी इसके लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं। वह पार्टी के प्रवक्ता के रूप में भी काम करते रहे हैं। दिल्ली में कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग उनकी वकालत कर रहा है
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राज्यसभा के एक उम्मीदवार राज बब्बर भी हो सकते हैं। समस्या केवल उनके बाहरी होने की है। लेकिन राज बब्बर को न केवल पंजाबी प्रतिनिधि के रूप में देखा जा सकता है बल्कि उनका ताल्लुक पिछड़े वर्ग से भी है । वह हरियाणा से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं विधानसभा में भी टिकट चाहते थे परंतु उनके नाम पर किसी ने विचार नहीं किया। राज बब्बर हरियाणा में कांग्रेस के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। उम्मीदवारों के नाम की चर्चा से ज्यादा जरूर महत्वपूर्ण यह है कि राज्यसभा के चुनाव में राहुल गांधी प्रियंका गांधी उम्मीदवार तय करने के मामले में किस तरह की इच्छा नीति के तहत काम करने वाले हैं। यह कि वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दबाव में रहेंगे या अपना उम्मीदवार तय करने की हिम्मत दिखाएंगे। वैसे भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस मामले में किसके पक्ष में हैं वह उसका फैसला कर चुके हैं परंतु भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कुआं बताने वाले लोग जानते हैं कि वह यह बात अपनी पत्नी आशा हुड्डा को भी नहीं बताएंगे। यही तो राजनीति है।
