
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
बीबीएन 30 जनवरी
(कविता शांति गौतम)
हिमाचल प्रदेश के बद्दी सहित प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में आज भी हज़ारों उद्योग किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। ये उद्योग वर्षों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान कर रहे हैं तथा स्थानीय लोगों को रोज़गार उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन आज भी स्थायी औद्योगिक ढांचे से वंचित हैं।
ठाकुर हरिओम सिंह सह संयोजक, औद्योगिक प्रकोष्ठ सोलन – (भारतीय जनता पार्टी) ने कहा कि लघु एवं मध्यम उद्योगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि निजी क्षेत्र की ज़मीनें अत्यधिक महंगे दामों पर उपलब्ध हैं, जिन्हें खरीदना उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर है। यदि कोई उद्योग बड़ी मुश्किल से निजी ज़मीन खरीद भी लेता है, तो उसके बाद वन, वन-8 एवं अन्य विभागीय अनुमतियों के लिए वर्षों तक भटकना पड़ता है। इस लंबी और जटिल प्रक्रिया के कारण कई उद्योग स्थापित ही नहीं हो पाते या प्रदेश से बाहर पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं।
प्रदेश के उद्योगों की यह सर्वसम्मत मांग है कि सरकार स्वयं आगे आकर सरकारी इंडस्ट्रियल प्लॉट उपलब्ध कराए और उन्हें किस्तों में भुगतान की सुविधा के साथ उद्योगों को आवंटित करे। इससे न केवल उद्योगों को स्थायित्व मिलेगा, बल्कि निजी ज़मीन, वन अनुमति और कानूनी उलझनों से भी राहत मिलेगी।
यदि सरकार इस दिशा में ठोस नीति बनाती है, तो इससे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर सृजित होंगे।
हिमाचल प्रदेश के हज़ारों किराये पर चल रहे उद्योग आज भी सरकार से यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी इस गंभीर समस्या का शीघ्र और स्थायी समाधान निकाला जाएगा। हरिओम सिंह ने सरकार से आग्रह किया है कि इस विषय पर संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि प्रदेश का उद्योग सुरक्षित रहे और विकास की गति तेज़ हो।
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