
कार्टून। साभार ।
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2022@gmail.com
देश में इसी वर्ष होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनाव और उनके नतीजे हरियाणा की राजनीति पर बहुत बड़ा असर डाल सकते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि किसी कारण से यदि यह आगामी चुनाव कांग्रेस के पक्ष में और भाजपा के खिलाफ चले गए, जिसकी अभी संभावना नजर आ रही है तो हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। असल में ये अधिकांश कांग्रेस मूल के वही नेता हैं जो 2014 में कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे।
इन नेताओं को हरियाणा में मौसम विज्ञानी कहा जाता है ।वह इसलिए कि वे राजनीतिक हालातो के अनुसार दल बदल करने से नहीं चूकते और उस दल में अपनी जगह बना लेते हैं जिसके सत्ता में आने के आसार नजर आने लगते हैं। बताते हैं कि हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के नेता भी इस संभावित उलट फेर से अनभिज्ञ नहीं है । यही कारण है कि प्रदेश में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार हरियाणा में लोकसभा चुनाव में अधिकांश नए उम्मीदवार उतरने की योजना पर कम करती नजर आ रही है। यह चर्चा आम है कि कांग्रेस से भारतीय जनता पार्टी में गए अधिकांश नेताओं का आरंभ से मुख्यमंत्री मनोहर लाल से किसी न किसी स्तर पर गतिरोध और मतभेदों की खबरें आती रही है।

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एक बात शीशे की तरह साफ है कि विधानसभा के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा के कांग्रेस मूल के नेता फिर से कांग्रेस में शामिल हुए तो इससे कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा निश्चित तौर पर कम हो जाएगा। 2014 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए कई नेता मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं और अब भाजपा में उन्हें यह संभावना दूर-दूर भी नजर नहीं आ रही कि इस दल में रहते उनकी यह महत्वाकांक्षा पूरी हो सकेगी। परिवारवाद को लेकर भाजपा की नीति भी इन सबको रास नहीं आ रही है जबकि कांग्रेस में उन्हें यह दिक्कत नहीं पेश आएगी। उपरोक्त सभी नेताओं की स्थिति अब ऐसी है कि सारे अपने बच्चों को राजनीति में स्थापित करने की तैयारी में है और बेटे बेटियों को अगले वर्ष अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट दिए जाने की शर्त पर उनका कांग्रेस में प्रवेश हुआ तो हरियाणा में कांग्रेस को भारी बूस्ट मिलेगा, ऐसी संभावना है।
भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने मेवात प्रकरण के समय जिस तरह की बयानबाजी की उसे सहज ही समझा जा सकता है क्योंकि कांग्रेस की ओर से भी लगभग इसी तरह के बयान दिए गए हैं।
चार प्रदेशों में विधानसभा के चुनाव नवंबर-दिसंबर में होने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल क्रमश 3 जनवरी और 6 जनवरी, 2024 को समाप्त हो रहा है । राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल 14 जनवरी और 16 जनवरी 2024 को समाप्त हो जाएगा. ।आगामी चुनावी राज्य पर नजर डालें तो इन सबको मिलाकर पांच विधानसभाओं की कुल 679 सीटों पर चुनाव होना है। इस समय मध्य प्रदेश तेलंगाना छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की स्थिति मजबूत बताई जा रही है लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि आम आदमी पार्टी का इन प्रदेशों में चुनाव लड़ना भी निर्णायक हो सकता है और भाजपा इसका लाभ उठाने की स्थिति में बताई जा रही है। बेशक अभी आम आदमी के पार्टी के नेता भाजपा के विरुद्ध विपक्ष के ध्रुवीकरण का साथ दे रहे हैं लेकिन अब भी इस बात की आशंका है की आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल आगामी विधानसभा चुनाव में खुद के फायदे के लिए किसी भी तरह की पलटी मार सकते हैं। गुजरात में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को बेशक बड़ी कामयाबी नहीं मिली हो लेकिन उसने कांग्रेस का मत प्रतिशत घटाने का और कांग्रेस को कमजोर करने का काम बड़ी चतुराई से करके दिखाया था।अब देखते हैं आगे आगे होता है क्या।
