
दक्ष दर्पण
(पुनीत महाजन) चंडीगढ़
हरियाणा, 1 अक्टूबर: दूध के उचित दाम और नकली व मिलावटी दूध के खिलाफ किसानों एवं पशुपालकों ने 1 से 3 अक्टूबर तक प्रदेशभर में दूध की सप्लाई बंद रखने का ऐलान किया है। आंदोलन के तहत गांवों से शहरों तथा निजी एवं सरकारी मिल्क प्लांटों तक दूध की आपूर्ति रोकने की अपील की गई है। सिरसा समेत कई क्षेत्रों में आंदोलन को लेकर तैयारियां की गई हैं।
आंदोलन से जुड़े किसानों और पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के चारे, खल, बिनौले तथा अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि दूध उत्पादकों को मिलने वाला भाव उनकी लागत के अनुरूप नहीं है। पशुपालकों की ओर से गाय के दूध का भाव ₹80 प्रति लीटर और भैंस के दूध का भाव ₹100 प्रति लीटर किए जाने की मांग उठाई गई है।
गांव-गांव मुनादी, दूध की खरीद-बिक्री रोकने की अपील
आंदोलन को सफल बनाने के लिए कई क्षेत्रों में गांव-गांव लोगों को जागरूक किया जा रहा है। किसानों, पशुपालकों, दूध विक्रेताओं और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों से 1 से 3 अक्टूबर तक दूध की खरीद-बिक्री और सप्लाई रोकने का आह्वान किया गया है। सिरसा में हुई बैठक में आंदोलन के दौरान दूध बेचने वाले व्यक्ति पर ₹51 हजार का सामुदायिक जुर्माना लगाने की बात भी सामने आई है।
मिल्क प्लांटों के बाहर धरने की तैयारी
आंदोलन के तहत किसानों ने वीटा सहित मिल्क प्लांटों तक जाने वाली दूध सप्लाई रोकने और प्लांटों के बाहर धरना देने की तैयारी की है। हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन के अंतर्गत राज्य में छह मिल्क प्लांट संचालित हैं और वीटा का नेटवर्क बड़ी संख्या में दूध उत्पादकों से जुड़ा हुआ है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ नकली और मिलावटी दूध एवं दुग्ध उत्पादों के खिलाफ जागरूकता पैदा करना भी है। आंदोलन से जुड़ी अपील में पंजाब और राजस्थान की ओर जाने वाली दूध सप्लाई पर भी असर पड़ने की बात कही गई है।
यदि आंदोलन व्यापक रूप से लागू होता है तो तीन दिनों के दौरान दूध की उपलब्धता और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
