
‘दक्ष दर्पण
मुंबई (जतिन/राजा)।
भारतीय सिनेमा में आध्यात्मिक कथाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे दर्शकों को आस्था, भक्ति और आत्मिक शांति से जोड़ने का भी काम करती हैं। स्वयंभू प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ भी इसी भाव को पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। फिल्म में भगवान हनुमान की भक्ति, संत परंपरा और आध्यात्मिक भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से सामने लाया गया है।

फिल्म में 13 वर्षीय बाल कलाकार विहान शेडगे ने बाबा नीम करौली के बाल स्वरूप ‘लक्ष्मी नारायण’ का किरदार निभाया है। विहान ने अपनी सहजता, मासूमियत और प्रभावशाली भाव-भंगिमाओं से इस आध्यात्मिक किरदार को जीवंत किया है। एक बाल कलाकार के लिए किसी आध्यात्मिक व्यक्तित्व के बाल स्वरूप को पर्दे पर उतारना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन विहान ने इस भूमिका को जिस स्वाभाविकता से निभाया, वह दर्शकों के दिल को छूती है।
कहा जाता है कि आध्यात्मिकता उम्र की मोहताज नहीं होती। कभी-कभी एक बच्चे की मासूम आंखों में भी ऐसी गहराई दिखाई दे जाती है, जो बड़े-बड़ों को भीतर तक सोचने पर मजबूर कर देती है। ‘हनुमान अंश’ में लक्ष्मी नारायण के रूप में विहान का किरदार मासूमियत और आध्यात्मिक भाव का ऐसा ही सुंदर संगम नजर आता है।
इसी विशेष भूमिका, फिल्म से जुड़े अनुभवों, बाबा नीम करौली के बाल स्वरूप लक्ष्मी नारायण को समझने की उनकी यात्रा और अभिनय के दौरान महसूस किए गए आध्यात्मिक अनुभवों को लेकर ‘हनुमान अंश’ में बाबा नीम करौली के बाल स्वरूप लक्ष्मी नारायण का किरदार निभाने वाले बाल कलाकार विहान शेडगे से जर्नलिस्ट जतिन ने की विशेष बातचीत ।
जतिन: अभिनय की शुरुआत कैसे हुई?
विहान: मैं बचपन से ही काफी शर्मीला था। मेरा आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए मां ने मेरा दाखिला एक्टिंग कोर्स में कराया। वहां कुछ सहपाठी मुझसे कहते थे कि मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा। उनकी बातें मेरे दिल पर लगीं और मैंने उसी समय ठान लिया कि मुझे जीवन में कुछ बड़ा करके दिखाना है। शायद वही बात मेरे लिए प्रेरणा बन गई और अभिनय के सफर की शुरुआत हुई।
जतिन: 13 साल की उम्र में ‘हनुमान अंश’ में बाबा नीम करौली के बाल स्वरूप ‘लक्ष्मी नारायण’ का किरदार निभाकर आपने पहचान बनाई। आगे फिल्म इंडस्ट्री में खुद को कहां देखना चाहते हैं?
विहान: मुझे हमेशा जमीन से जुड़े रहना पसंद है। मैं एक सफल अभिनेता जरूर बनना चाहता हूं, लेकिन उससे पहले एक अच्छा इंसान बनना मेरी प्राथमिकता है। मेरे लिए सफलता के साथ अच्छा इंसान बने रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।
जतिन: ‘हनुमान अंश’ में आपकी मासूमियत, करुणा, भक्ति और सहज भावों ने दर्शकों को प्रभावित किया। बाबा नीम करौली के बाल स्वरूप लक्ष्मी नारायण की भूमिका निभाने के लिए क्या आपको कोई विशेष तैयारी करनी पड़ी?
विहान: देखिए, वैसे तो इस पूरी फिल्म को बनाने और इसके सफल होने में बाबा नीम करौली की ही विशेष कृपा है। हमारे निर्देशक विशाल चतुर्वेदी जी का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने मुझे हर कदम पर मार्गदर्शन दिया और भूमिका को समझने में मेरी बहुत मदद की।
जतिन: ‘हनुमान अंश’ से जुड़ा कोई ऐसा अनुभव, जिसने आपकी जिंदगी को भी प्रभावित किया हो?
विहान: फिल्म मिलने से करीब चार दिन पहले ही मैंने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया था और इसके चार दिन बाद ही मुझे इस फिल्म में काम करने का अवसर मिल गया। मेरे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। इस फिल्म के बाद मैंने अपने स्वास्थ्य में भी काफी सकारात्मक बदलाव महसूस किया। अब मैं नियमित रूप से समय पर उठता हूं और हनुमान चालीसा का पाठ भी करता हूं।
जतिन: विहान, शूटिंग के दौरान सेट पर आप सबसे ज्यादा किसके साथ सहज महसूस करते थे? इस पूरी फिल्म के दौरान आपके सबसे ज्यादा करीब कौन रहे?
विहान: शोभिनव सत्या मेरे सबसे ज्यादा करीब रहे। उन्होंने मुझे हमेशा अपने छोटे भाई की तरह प्यार और अपनापन दिया। जब मुझे सर्दी होती थी तो वे मेरा सिर दबाते थे और स्क्रिप्ट को लेकर कोई उलझन होती थी तो बड़े भाई की तरह समझाकर मेरी मदद करते थे। मुझे हमेशा ऐसा लगता था, जैसे मैं अपने ही बड़े भाई के साथ हूं।
जतिन: विहान, फिल्म में आपका ध्यान और योग वाला किरदार बेहद प्रभावशाली लगा। क्या आप वास्तविक जीवन में भी रोजाना ध्यान और योग करते हैं?
विहान: हां, मैं पुणे के श्री श्री रविशंकर विद्या मंदिर में पढ़ता हूं, जहां रोजाना हमें योग और ध्यान कराया जाता है। नियमित अभ्यास से ध्यान में मेरी अच्छी पकड़ बनी है और इसका फायदा मुझे फिल्म में भी मिला। शूटिंग के दौरान ‘कट’ कहे जाने के बाद भी मैं काफी देर तक पानी में ध्यान करता रहता था।
जतिन: ‘हनुमान अंश’ की अपार सफलता से आपने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। अपनी इस सफलता का श्रेय आप किसे देना चाहेंगे?
विहान: सबसे पहले मैं अपनी मां सायली शेडगे को इसका श्रेय दूंगा, क्योंकि उन्होंने ही मुझे अभिनय की शुरुआत करवाई। इसके साथ ही मैं पूरी फिल्म की टीम का दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी जी ने मुझ पर भरोसा किया और मुझे इस भूमिका के योग्य समझा। वे हमेशा मुझे अपना ‘लकी चार्म’ कहते थे। प्रोड्यूसर नम्रता मैम, रागिनी, अनुप्रिया, नेहा और विशाल बावा सर ने मेरा बहुत ख्याल रखा और हर कदम पर सहयोग दिया। अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे, साधु तिवारी, राजीव मिश्रा, ऋषि पाठक और सत्यम सिंह सहित पूरी टीम ने मुझे इतना प्यार और अपनापन दिया कि यह सफर मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा।
जतिन: विहान, फिल्म जगत से जुड़ा आपका कोई बड़ा सपना या ऐसी इच्छा, जिसे आप भविष्य में पूरा होते देखना चाहते हैं?
विहान: सबसे पहली इच्छा है कि मैं जल्दी ही नीम करौली बाबा के दर्शन करने जाना चाहता हूँ,मेरा सपना है कि भविष्य में मुझे रितेश देशमुख और सलमान खान के साथ किसी फिल्म में काम करने का मौका मिले। इसके अलावा मेरी दिली इच्छा है कि मैं विराट कोहली और अनुष्का शर्मा से जल्द मिल सकूं।
