
दक्ष दर्पण
फतेहाबाद।
जैन समाज के पवित्र पर्युषण पर्व के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय प्रजापति संघ ने जिलेभर में बूचडख़ानों एवं पशु वध से जुड़ी तमाम गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग उठाई है। संघ का कहना है कि पर्युषण पर्व केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति को अहिंसा, जीव-दया, करुणा और आत्म-संयम का महान संदेश देता है। ऐसे पवित्र अवसर पर जीव हिंसा पर रोक लगाना धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की दिशा में एक जरूरी कदम है। राष्ट्रीय प्रजापति संघ के अध्यक्ष मुकेश प्रजापति ने बयान जारी करते हुए कहा कि पर्युषण पर्व के दौरान जिले ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बूचडख़ानों और मांस की दुकानों को बंद रखने के संबंध में सरकार व स्थानीय प्रशासन को तुरंत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की मूल चेतना अहिंसा पर आधारित है और इस महापर्व के दौरान समाज का हर वर्ग अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।
मुकेश प्रजापति ने कहा, धार्मिक और सांस्कृतिक आस्थाओं का सम्मान करना ही भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है। पर्युषण पर्व के दौरान पशु-पक्षियों की बलि या वध पर रोक लगाने से क्षेत्र में शांतिपूर्ण, पवित्र और धार्मिक वातावरण निर्मित होगा। सरकार को जनभावनाओं का आदर करते हुए इस दिशा में त्वरित और ठोस कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही, राष्ट्रीय प्रजापति संघ के अध्यक्ष ने जिले के सभी वर्गों और समुदायों से आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और एक-दूसरे की धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहार तभी सार्थक होते हैं जब हम दूसरों की आस्था का सम्मान करें और समाज में करुणा एवं प्रेम का माहौल बनाएं। संघ ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस संवेदनशील और धार्मिक विषय पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द बूचडख़ाने बंद कराने के आदेश जारी करेगा।
