
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
(पोलिटिकल डैस्क) dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़।
पंजाब में विधानसभा के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता धीरे-धीरे उन्ही मान्यताओं और चर्चाओं को स्वीकार करते जा रहे हैं जो आमतौर पर पंजाब के पब्लिक डोमेन में है।
सब जानते हैं कि पंजाब भाजपा के नेताओं के लिए एक पॉलिटिकल लैबोरेट्री है और उन के लिए पंजाब का मौजूदा चुनाव अपनी प्राथमिकताओं को अमली जामा पहनाने का एक अवसर भी है। किसी ने ठीक कहा है कि पंजाब में भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू हैं। उसके पास खोने को कुछ नहीं है लेकिन पाने के अवसर कई हैं।
पंजाब का चुनाव भाजपा के लिए एक अवसर है, इसे इस नजरिए से समझा जा सकता है कि पार्टी इस चुनाव में न केवल अकेले दम पर मतलब सभी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है बल्कि उसके नेताओं का प्रयास है कि अन्य दल भी अलग-अलग अकेले ही चुनाव लड़े। कुछ ऐसे ही हालात बनते नजर भी आ रहे हैं।
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गठबंधन की बात करें तो सबसे व्यवहारिक संभावना भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के एक बार फिर से मिलकर चुनाव लड़ने की हो सकती थी है परंतु पार्टी के निर्णायक नेताओं ने अब साफ कर दिया है कि गठबंधन एक चर्चा तो हो सकती है लेकिन यह सच्चाई बिल्कुल नहीं है। वह इसलिए कि हालत यह नजर आ रहे हैं किभाजपा सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बेशक पिछले चुनाव में शिरोमणि अकाली दल और बसपा ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था लेकिन आगामी चुनाव में बसपा अकेले चुनाव लड़ती नजर आ सकती है ।शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी ,भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार सभी सीटों पर मैदान में होंगे ऐसा नजर आ रहा है। भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाना चाहती है।
भारतीय जनता पार्टी की पहली प्राथमिकता खुद सरकार बनाने की है। इसका दावा भाजपा के सारे नेता कर रहे हैं।
भाजपा की दूसरी प्राथमिकता यह है कि पंजाब में कांग्रेस सत्ता में न आए इसका अर्थ यह भी है कि बेशक आम आदमी पार्टी फिर से सरकार बना ले। उसकी प्राथमिकता यह भी हो सकती है कि पंजाब में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बन जाए ऐसी स्थिति में भी उसका सरकार बनाना आसान हो जाएगा। लोग यह भी कहने लगे हैं कि भाजपा गठबंधन तो कर सकती है वह भी शिरोमणि अकाली दल के साथ ही लेकिन वह तब हो सकेगा जब चुनाव के परिणाम आ जाएंगे और भाजपा को दूसरे दलों के सहयोग की जरूरत पड़ेगी।
जब चुनाव होंगे तो पंजाब में एक बड़ा खेला एक बार फिर हो सकता है वह है तोड़फोड़ और जोड़ तोड़ का।
भारतीय जनता पार्टी टिकट वितरण के समय आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी के उन मजबूत उम्मीदवारों को टिकट देने के नाम पर भाजपा में शामिल कराने का प्रयास करेगी जो अपने-अपने दलों में संतुष्ट नहीं होंगे ,जिनकी टिकटें कट जाएंगी। इसीलिए पंजाब में भाजपा बागी नेताओं का डेस्टिनेशन भी हो सकती है।
भारतीय जनता पार्टी पंजाब में नशे और कमजोर कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ती नजर आ रही है। अंदर की बात करें तो
भारतीय जनता पार्टी के नेता उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, और उत्तराखंड के चुनाव से ज्यादा रुचि पंजाब में ले रहे हैं। पंजाब में सत्ता पर काबिज होना भाजपा ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जहां चुनौती है वहां अवसर भी है। पंजाब में भाजपा के प्रभारी और सांसद सतीश पूनिया ने पिछले दिनों जब इस बात का दावा किया कि भाजपा सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, तब से पंजाब में एक नई चर्चा यह शुरू हो गई है कि अब पंजाब का चुनाव लगातार रोचक होता जाएगा। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव को तकनीकी तौर पर और माहौल बनाकर लड़ने की योजना पर काम कर रही है।
पंजाब के चुनाव को लेकर इसलिए यह बात कर रहे हैं कि यहां भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू हैं। वह इसलिए कि उसे सरकार बनाने का अवसर मिल सकता है, उसे अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस को एक बार फिर सत्ता से बाहर रखने का अवसर मिल सकता है। सत्ता में नहीं आए तो भी उसे पंजाब में अपनी ताकत दिखाने का अवसर मिल सकता है। भारतीय जनता पार्टी पंजाब में सभी दलों को एक्सपोज करने की स्थिति में भी आ सकती है।
