चीनी, तेल, दालों और फलों के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, गरीब व मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान:

दक्ष दर्पण
चंडीगढ़, 28 अगस्त।
त्योहारों के शुभ दिन शुरू होते ही आम जनता के सामने एक बार फिर महंगाई का संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। एक तरफ सरकारों में बैठे लोग, बड़ी-बड़ी कंपनियां और उद्योगपति त्योहारों पर जनता को बधाई, मुबारकबाद और हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन दूसरी तरफ बाजार में चीनी, खाद्य तेल, दालों, फलों और अन्य रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दाम आम आदमी का बजट बिगाड़ रहे हैं।
ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सैक्टर-13, चंडीगढ़ के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने बढ़ती महंगाई पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों के मौसम में सबसे ज्यादा मार गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ती है। यदि सरकार और प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आम परिवारों के लिए त्योहारों की खुशियां भी महंगाई के बोझ तले दब सकती हैं।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि त्योहारों के मौसम में नाजायज़ जमाखोरी और मुनाफाखोरी की आशंका बढ़ जाती है। सरकार और प्रशासन को बाजारों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए, ताकि किसी भी आवश्यक वस्तु की कृत्रिम कमी पैदा कर जनता को महंगे दामों पर सामान खरीदने के लिए मजबूर न किया जा सके।
चिंताजनक बढ़ोतरी के आंकड़े
वस्तु
पहले का भाव
वर्तमान भाव
चीनी
₹45
₹70
खाद्य तेल
₹180
₹200
अरहर दाल
₹130
₹154
मूंग दाल
₹100
₹128
चना
₹85
₹96
राजमा
₹130
₹164
बादाम
₹900
₹1120
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि अकेली चीनी के दामों में भारी बढ़ोतरी ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। आशंका यह भी है कि चीनी की कीमतों में हुई तेज वृद्धि की आड़ में अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ा दिए जाएं। उपभोक्ता को वास्तविक झटका तब लगता है, जब बाजार में पहले कम कीमत पर मिलने वाली वस्तु कुछ समय बाद दोगुने से अधिक दाम पर खरीदनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार फलों की कीमतों में भी भारी वृद्धि देखी जा रही है। सवाल यह है कि क्या हमारे देश में खाद्य वस्तुओं, फलों, दालों और अन्य जरूरी सामान की वास्तव में कमी है? यदि पर्याप्त उत्पादन और उपलब्धता है, तो फिर आम आदमी तक पहुंचते-पहुंचते इन वस्तुओं के दाम इतने अधिक क्यों हो जाते हैं?
महिलाओं और गृहिणियों की रसोई पर सबसे बड़ी मार:
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर देश की बहनों और गृहिणियों की रसोई पर पड़ता है। हर महिला सीमित बजट में अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने और अपने घर को हंसी-खुशी चलाने का प्रयास करती है। लेकिन जब चीनी, तेल, दाल, सब्जी, फल और अन्य रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ते हैं, तो सबसे पहले घर की रसोई का बजट बिगड़ता है।
उन्होंने कहा कि रक्षा बंधन जैसे पवित्र त्योहार की असली बधाई तभी सार्थक होगी, जब बहनों और महिलाओं को महंगाई से राहत मिलेगी। केवल राखी बांधने, मिठाई खिलाने और शुभकामनाएं देने से त्योहार की खुशियां पूरी नहीं होतीं। एक बहन और गृहिणी की सबसे बड़ी खुशी तब होगी, जब वह बिना महंगाई की चिंता के अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सके और अपने बच्चों व परिवार के लिए हर खुशी जुटा सके।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सरकारें केवल कागजी और बयानी बधाई, मुबारकबाद और हार्दिक शुभकामनाएं देने तक सीमित न रहें। सरकारों को धरातल पर काम करते हुए आम जनता, विशेषकर महिलाओं और गृहिणियों को बढ़ती महंगाई से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा, “सरकार की असली शुभकामना तभी मानी जाएगी, जब बहनों और महिलाओं की रसोई का बजट संभलेगा, उनके परिवारों को महंगाई से राहत मिलेगी और वे बिना आर्थिक चिंता के अपने बच्चों व परिवार के साथ त्योहारों की खुशियां मना सकेंगी।”
सरकार और प्रशासन से प्रमुख मांगें:
राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि—
त्योहारों से पहले जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।
चीनी, तेल, दालों और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों की नियमित निगरानी की जाए।
बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
आम जनता को राहत देने के लिए आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
कीमतों में अचानक वृद्धि के कारणों को सार्वजनिक किया जाए।
गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की रसोई का बजट बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि महंगाई का जोर का झटका अक्सर धीरे-धीरे लगता है। आज चीनी महंगी होती है, कल तेल और दाल बढ़ते हैं, फिर फल और अन्य जरूरत की वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। पता तब चलता है, जब महीने का पूरा बजट हाथ से निकल चुका होता है।
उन्होंने कहा, “रक्षा बंधन पर बहनों की असली सुरक्षा और सम्मान केवल शब्दों, बधाई संदेशों और शुभकामनाओं से नहीं होगा, बल्कि ऐसी नीतियों और ठोस कार्रवाई से होगा जो उनकी रसोई, उनके परिवार और उनके मासिक बजट को महंगाई की मार से बचाए। सरकारों को त्योहारों पर केवल शुभकामनाएं देने के बजाय धरातल पर महंगाई से निजात दिलाने का काम भी करना चाहिए।”
