
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़ ।
सेक्टर-23 स्थित श्री मुनि जी की धर्मशाला, चंडीगढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान सत्र में हिमाचल महासभा रजि. चंडीगढ़ के प्रधान पृथी सिंह प्रजापति अपनी टीम के साथ विशेष रूप से शामिल हुए और कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर कथा वाचक डॉ. स्वामी वागीश स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन के नैतिक मूल्यों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
अपने प्रवचनों में कथा वाचक ने कहा कि आज माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा पर निजी स्कूलों में लाखों रुपये खर्च करते हैं और उम्मीद करते हैं कि स्कूल ही उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी देंगे। लेकिन हमें यह समझना होगा कि बच्चा स्कूल में लगभग 6 घंटे बिताता है, जबकि शेष 18 घंटे वह अपने परिवार और घर के वातावरण में रहता है। ऐसे में बच्चों के भीतर अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य, अनुशासन और बड़ों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी माता-पिता की होती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार देना भी उतना ही आवश्यक है। माता-पिता का आचरण, परिवार का वातावरण और घर में मिलने वाली सीख ही बच्चों के व्यक्तित्व एवं उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है।
इस धार्मिक आयोजन में हिमाचल महासभा रजि. चंडीगढ़ की ओर से प्रधान पृथी सिंह प्रजापति, चेयरमैन भागीरथ शर्मा, सलाहकार संतोष भारद्वाज, उपप्रधान संजीव कुमार, अजय कुमार, विकास शर्मा, विजय राणा, संजीव लखनपाल, कमल कुठियाला तथा सदस्य राजिंदर कुमार अपने परिवार सहित उपस्थित रहे। इनके साथ महासभा के अन्य सम्मानित सदस्यों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
हिमाचल महासभा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने इस धार्मिक आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजन समाज में धार्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज के समय में नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना बेहद जरूरी है।
अंत में हिमाचल महासभा की टीम ने आयोजकों के प्रयासों की सराहना की और समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया।
