
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
देहरादून।13 जुलाई 2025 से शनि मीन राशि में वक्री होकर 138 दिन तक रहेंगे, जिससे सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह अवधि कर्मों के फल, अनुशासन और मानसिक परिपक्वता की कसौटी साबित हो सकती है, इस अवधि में किसी के सिर राज मुकुट सज सकता है तो किसी का अकस्मात छत्र भंग भी हो सकता है।
उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” विश्लेषण करते हुए बताते हैं कि 13 जुलाई 2025 को सुबह 7 बजकर 24 मिनट पर न्याय के देवता शनि वक्री अवस्था में प्रवेश करने जा रहे हैं, वो भी मीन राशि में। शनि ग्रह को वैदिक ज्योतिष में कर्मों का न्यायाधीश कहा जाता है । ये ग्रह हमारे द्वारा किए गए अच्छे-बुरे कर्मों का फल देता है। इसी ग्रह की वजह से जीवन में अनुशासन, स्थायित्व और परिपक्वता भी आती है।
शनि देव अभी मीन राशि में हैं और 29 मार्च 2025 को उन्होंने अपनी स्वयं की राशि कुंभ से मीन राशि में प्रवेश किया था, जहाँ वे अब लगभग 138 दिन तक यानी 13 जुलाई से 28 नवंबर 2025 तक वक्री अवस्था में रहेंगे, यह एक लंबी अवधि है और इसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत जीवन पर ही नहीं, बल्कि देश, समाज और वैश्विक घटनाओं पर भी पड़ेगा। सभी 12 राशियों पर शनि की वक्री चाल का प्रभाव निम्न प्रकार से पड़ेगा।
मेष राशि
13 जुलाई 2025 से शनि ग्रह इनकी कुंडली के द्वादश भाव में वक्री हो रहे हैं, जो खर्च, विदेश यात्रा और आत्मचिंतन का भाव माना जाता है। यह समय पिछले महीनों से चले आ रहे अनचाहे खर्चों और मानसिक थकावट में थोड़ी राहत ला सकता है। विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए अब अवसर बन सकते हैं, लेकिन योजना पक्की और व्यावहारिक होनी चाहिए। स्वास्थ्य में सुधार संभव है,भावनात्मक रूप से खुद को थोड़ा अकेला महसूस कर सकते हैं, परिवार से दूरी बनी रह सकती है। संयम, अनुशासन और शनि ग्रह का उपचार करने से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
कार्यक्षेत्र में समर्थन कम मिल सकता है, इसलिए आत्मनिर्भरता पर जोर दें।
वृषभ राशि
शनि इस समय लाभ भाव में वक्री हो रहे हैं। यह गोचर सामाजिक दायरे, मित्रों और आकस्मिक लाभ पर प्रभाव डालेगा। पहले जो लाभ सहजता से मिल रहे थे, उनमें अब कुछ विलंब हो सकता है या अपेक्षाएं अधूरी रह सकती हैं। कार्यक्षेत्र में समर्थन कम मिल सकता है, इसलिए आत्मनिर्भरता पर जोर दें। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव है, विशेष रूप से जोड़ों या त्वचा से जुड़ी समस्याएं।कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने से स्थिति धीरे-धीरे अनुकूल हो सकती है।
मिथुन राशि
शनि इस राशि के कपड़े दशम भाव में वक्री हो रहे हैं ,जो करियर, पिता और सामाजिक प्रतिष्ठा से संबंधित है। यह समय करियर में कुछ अवरोध, विलंब या अनिश्चितता लेकर आ सकता है। हालांकि नुकसान की आशंका नहीं है, लेकिन आपको दोगुनी मेहनत करनी पड़ सकती है। बॉस या वरिष्ठों के साथ टकराव से बचें और सरकारी कामों में सावधानी बरतें। किसी लंबित कार्य की गति धीमी हो सकती है। कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने से स्थिति धीरे-धीरे अनुकूल हो सकती है मानसिक रूप से ऊहापोह की स्थिति बनी रह सकती है।
कर्क राशि
शनि का भाग्य भाव में वक्री होना इनके लिए मिला-जुला समय लेकर आएगा। इस समय किस्मत पर कम और कर्म पर अधिक भरोसा करना होगा। धार्मिक यात्रा या उच्च शिक्षा से संबंधित कार्यों में विलंब संभव है, लेकिन प्रयास जारी रखने से सफलता मिलेगी। मानसिक रूप से ऊहापोह की स्थिति बनी रह सकती है। व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं।
कार्यक्षेत्र में अचानक बदलाव या असहज स्थिति से बचने के लिए कुंडली का विश्लेषण करवाए।
सिंह राशि
शनि का अष्टम भाव में वक्री होना स्वास्थ्य, अचानक होने वाली घटनाओं और गुप्त शत्रुओं से जुड़ा है। पेट संबंधी परेशानी, थकान या पुरानी बीमारियों की वापसी हो सकती है। कार्यक्षेत्र में अचानक बदलाव या असहज स्थिति सामने आ सकती है। किसी भी प्रकार का बड़ा जोखिम उठाने से बचें, विशेषकर आर्थिक मामलों में। संयम और अनुशासन से ही आप स्थायित्व प्राप्त कर सकेंगे।
व्यावसायिक साझेदारियों में संदेह या असहमति उत्पन्न हो सकती है।
कन्या राशि
शनि सप्तम भाव में वक्री हो रहे हैं जो विवाह, साझेदारी और पब्लिक रिलेशन से जुड़ा है। वैवाहिक जीवन में मतभेद की संभावना बढ़ सकती है। व्यावसायिक साझेदारियों में संदेह या असहमति उत्पन्न हो सकती है। रिश्तों में लचीलापन बनाए रखना आवश्यक है। स्वास्थ्य संबंधी विषयों में खानपान पर विशेष ध्यान दें।
यह समय कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अच्छा है, लेकिन आपको अधिक मेहनत करनी होगी।
तुला राशि
छठे भाव में वक्री शनि रोग, ऋण और शत्रु से संबंधित है। यह समय कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अच्छा है, लेकिन आपको अधिक मेहनत करनी होगी। शत्रु या प्रतिस्पर्धी सक्रिय हो सकते हैं, कार्यक्षेत्र में जरा सी लापरवाही आपको भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है, विशेष रूप से स्किन या ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।नए कार्य की योजना बनाना फिलहाल 30 नवंबर तक स्थगित करें।
वृश्चिक राशि
पंचम भाव में शनि का वक्री होना शिक्षा, संतान और प्रेम जीवन पर असर डाल सकता है। इस समय आपकी सोच थोड़ी भ्रमित हो सकती है। नए कार्य की योजना बनाते समय सतर्क रहें। विद्यार्थियों को एकाग्रता में कठिनाई हो सकती है, जबकि प्रेम संबंधों में संवाद की कमी समस्या उत्पन्न कर सकती
वाहन सावधानी से चलाएं और माता के स्वास्थ्य की अनदेखी न करें।
धनु राशि
चतुर्थ भाव में वक्री शनि परिवार, माता, वाहन और निवास से जुड़ा होता है। पारिवारिक तनाव या घर में किसी मरम्मत की जरूरत हो सकती है। वाहन सावधानी से चलाएं और माता के स्वास्थ्य की अनदेखी न करें। कामकाज में स्थान परिवर्तन या अस्थिरता महसूस हो सकती है।
कार्यक्षमता बनी रहेगी, लेकिन मानसिक अस्थिरता रह सकती है। –
मकर राशि
शनि तीसरे भाव में वक्री हो रहे हैं जो साहस, भाई-बंधु और संचार से जुड़ा है। कार्यक्षमता बनी रहेगी, लेकिन मानसिक अस्थिरता रह सकती है। भाई-बहनों से वाद-विवाद से बचें। यात्राओं में लाभ होगा लेकिन थकावट भी बनी रह सकती है। किसी प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होगा।
कुंभ राशि
धन भाव में वक्री शनि आपकी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक माहौल पर असर डाल सकते हैं। धन संचय धीमा हो सकता है या अनावश्यक खर्चों में वृद्धि हो सकती है। खानपान में सावधानी न रखने पर गले या दांतों से जुड़ी समस्या हो सकती है। पारिवारिक तालमेल पर थोड़ा असर पड़ सकता है।
किसी बात को लेकर मानसिक दबाव बना रह सकता है।
मीन राशि
लग्न भाव में वक्री शनि का असर पूरे जीवन पर पड़ता है। यह आत्मबल, स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता को प्रभावित करता है। इस समय आपको खुद से अधिक प्रश्न करने की आदत लग सकती है, जिससे आत्मविश्वास में गिरावट आ सकती है। किसी बात को लेकर मानसिक दबाव बना रह सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और आलस्य से दूर रहें। आत्मचिंतन करें, पर आत्मग्लानि से बचें।
सटीक भविष्यवाणियों के लिए विश्व प्रसिद्ध आचार्य दैवज्ञ कहते हैं, कि शनि देव के वक्री होने से भूकंप, अचानक अतिवृष्टि,बादल फटना, दुर्घटनाएं, बीमारियों का फैलना हो सकता है इसलिए जनता एवं सरकार दोनों सतर्क रहें।
