दक्ष दर्पण समाचार सेवा
कैथल (कृष्ण प्रजापति): आज जब पूरी दुनिया युद्ध, सामाजिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु आपदाओं जैसे गंभीर संकटों से गुजर रही है, ऐसे समय में जमियत उलेमा-ए-हिंद के कैथल जिला अध्यक्ष मौलाना सईदूर रहमान ने इस्लाम की शांति, करुणा और न्याय आधारित शिक्षाओं को मानवता के लिए मार्गदर्शक बताया है।
मौलाना ने कहा कि इस्लाम केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवन पद्धति है जो मानवता, सद्भाव और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देती है। उन्होंने कुरान और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं का हवाला देते हुए बताया कि इस्लाम का मूल संदेश ही “शांति” है। कुरान में कहा गया है कि तुम न्याय पर दृढ़ रहो, चाहे वह तुम्हारे अपने विरुद्ध ही क्यों न हो, जो इस्लाम की न्यायप्रियता को स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम न केवल युद्ध में नैतिकता सिखाता है, बल्कि शांति स्थापना के लिए संवाद और सहिष्णुता को भी प्राथमिकता देता है। कुरान में स्पष्ट है कि यदि वे शांति की ओर झुकें, तो तुम भी झुको। इसी प्रकार पैगंबर मुहम्मद ने मक्का विजय के समय अपने सबसे बड़े शत्रुओं को क्षमा कर यह दिखा दिया कि इस्लाम प्रतिशोध नहीं, बल्कि करुणा और क्षमा को सर्वोपरि मानता है। मौलाना ने कहा कि कुरान के अनुसार एक निर्दोष की हत्या पूरी मानवता की हत्या के समान है। यह स्पष्ट करता है कि इस्लाम निर्दोषों की हत्या, आतंक या अराजकता का समर्थन नहीं करता। इस्लामी शिक्षाएँ जानवरों और पर्यावरण तक के अधिकारों की रक्षा करती हैं, जो आज की वैश्विक जलवायु चिंता के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है।
उन्होंने यह भी बताया कि ज़कात, सदका और खैरात जैसी दान की परंपराएं सामाजिक असमानता को कम करने और गरीबों की सहायता के लिए अनिवार्य बनाई गई हैं। ये शिक्षाएं आज के सामाजिक और आर्थिक संकटों के समाधान में प्रभावी हो सकती हैं। मौलाना सईदूर रहमान ने इस अवसर पर मुस्लिम समाज सहित सभी धर्मों के लोगों से आह्वान किया कि वे इस्लाम की मूल शिक्षाओं नैतिकता, न्याय, करुणा और संवाद को अपनाएं और एक शांतिपूर्ण, समरस और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि जब दुनिया संकटों से जूझ रही है, तब हमें नफरत नहीं, मोहब्बत और इंसानियत का संदेश देना है। इस्लामी शिक्षाएं यदि ईमानदारी से अपनाई जाएं, तो वे केवल मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याणकारी सिद्ध हो सकती हैं।

