दिल्ली में महिला खिलाड़ियों के साथ हुए यौन शौषण के खिलाफ मौन जुलूस। हाथों में मशाल लेकर सड़कों पर उतरे लोग।दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर कब तक बलात्कारियों का साथ देते रहेंगे।

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अशोक कुमार कौशिक

दक्ष दर्पण समाचार सेवा
नारनौल। विभिन्न संगठनों से जुड़े नागरिकों ने जंतर मंतर पर आंदोलित महिला पहलवानों के समर्थन में शुक्रवार देर शाम मौन जुलूस निकाला। दिल्ली में महिला खिलाड़ियों के साथ हुए यौन शौषण के विरोध में, महिला खिलाड़ियों के साथ हो रहे अन्याय और दिल्ली पुलिस की ज्यादतियों के खिलाफ़ शहर की जागरूक समाजसेवी महिलाओं की अगुआई में नारनौल के विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज सेवियों ने मिल कर एक गैर राजनीतिक जनता ने इस अवसर पर हाथों में तख्तियां और मसान पकड़ी हुई थी।
मौन मशाल रैली महावीर चौक से आरंभ होकर आज़ाद चौक पर जाकर समाप्त हुई। सभी आंदोलनकारी जलती हुई मशालें र तख्तियां हाथ में लेकर मौन धारण किए प्रदर्शन को शांतिपूर्ण किया।

इस विरोध रैली के समापन पर प्रमुख समाज सेविका सोनू सैनी धर्मपत्नी सुरेश सैनी, ज्योति सैनी ने सांझा बयान दिया कि भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सात महिला खिलाड़ियों ने यौन शौषण का आरोप लगाया, जिसमें एक नाबालिग महिला खिलाड़ी भी शामिल है। इन खिलाड़ियों में से साक्षी फोगट ने तो ओलंपिक में भारत को मेडल दिलवा कर देश का नाम रोशन किया है। उसके साथ हुए यौन शोषण की शिकायत भी सत्ता के लिए कोई मायने नहीं रखती, तभी तीन महीने पहले धरने पर बैठने के बाद भी मोदी सरकार ने महिला खिलाड़ियों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नही की।

ज्योति भटनागर और राजनीतिक नेत्री चंद्रकला ने कहा कि बृजमोहन शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नही कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का डंडा नही चला। दिल्ली पुलिस के रवैये ने महिलाओं की अस्मिता को तार तार कर दिया ।

नगर सेठ अजीत जैन और पूर्व नगर परिषद चेयरमैन एडवोकेट राजकुमार चौधरी ने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुए आठ दिन से ऊपर हो गए है पर अभी तक पुलिस कोई भी कार्यवाही करती हुई नजर नही आ रही। और साथ में ये कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज ने साफ कहा है कि न्याय की पुकार ये है कि दिल्ली पुलिस निष्पक्ष जांच करे।

अपनें उद्बोधन में क्रांतिकारी नेता महेश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार, बृजमोहन के खिलाफ जांच करने में कोताही बरत रही है और इसको अलग अलग बहाने बना कर राजनीतिक रंग देकर न्याय के लिए उठाई गई मांग को भटका देना चाहती है। डॉक्टर सुकेश दीवान ने कहा कि बीजेपी के प्रवक्ता महिला खिलाड़ियों की न्याय की मांग को जाति विशेष का जामा पहना कर यह सिद्ध करना चाह रह है कि यह यौन शौषण की शिकायत मात्र जातिवाद का एक राजनीतिक रूप है, जिसे विपक्ष चला रहा है। डॉक्टर मनीष यादव ने कहा कि जब यही महिला खिलाडी, देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने खून पसीने से, मेहनत से, अपने हुनर से, पदक जीत कर लाते है तो वो सिर्फ भारतीय होते है ना कि कोई जाट या यादव या सिख।

शहर के उद्योगपति एवं अधिवक्ता रविंद्र सिंह मटरू ने कहा कि यह मौन विरोध, देश की खिलाड़ी बेटियों के समर्थन में और सरकार की दमन कारी नीतियों के खिलाफ किया गया है। यह मौन विरोध, तूफान से पहले की खामोशी है। जब तक बृजमोहन गिरफ्तार नही होगा तब तक ये आंदोलन रुकने वाला नही। इस अवसर पर महेंद्र राता वाला ने कहा हरियाणा के हर जिले का जागरूक नागरिक, दिल्ली में जाकर महिला पहलवानों को समर्थन देकर उनकी ताकत को और ज्यादा मजबूत करेंगे।

नारनौल के प्रमुख समाजसेवक और क्रांतिकारी नेता नरेंद्र राव इंजीनियर ने कहा कि यदि यही बृजभूषण शरण सिंह बीजेपी का सांसद ना होकर किसी विपक्षी पार्टी का होता तो मोदी सरकार जमानत तक नहीं होने देती। पोस्को एक्ट के तहत मुलजिम को गिरफ्तार किया जाता है जबकि यहां बृजभूषण हीरो बन कर रोज टीवी पर साक्षात्कार दे रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी गिरीश खेड़ा व हरेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ का जो नारा दिया था उस नारे का असल मतलब ये था कि बीजेपी के नेताओं से बेटी बचाओ। उन्नाव के बलात्कारी एमएलए कुलदीप सेंगर बीजेपी के व्यभिचारी चिन्मयानंद से लेकर बृजमोहन तक सभी को राजनीतिक संरक्षण दिया गया ना कि बेटी को न्याय।
नारनौल की जानी मानी दबंग हस्ती कैलाश सोनी ने कहा कि अगर देश को विदेशों में गौरव दिलवाने वाली बेटियों को अपने साथ हुए यौन शौषण की शिकायत दर्ज करवाने के लिए, न्याय पाने के लिए, यौन शौषण कर्ता को सजा दिलवाने के लिए दिन रात, बरसात में भी, सड़कों रहना पड़े तो एक आम बेटी को ऐसे अपराधों में न्याय मिलना तो असंभव ही है।

पूर्व फौजी करण सिंह यादव , समाजसेवी जीतू कपिल व मास्टर भोजेंदर, जाट गांवड़ी ने कहा कि महिला खिलाड़ियों को न्याय तो छोड़ो, बरसात के पानी से उनके बिस्तर भीग जाने के कारण, रात को सोने के लिए फोल्डिंग बेड मंगवाने पर ही दिल्ली पुलिस ने तो खिलाड़ी के सिर तक ऐसे फाड़ दिए, जैसे की बेड पर सोना अपराध है, जैसे कि वो फोल्डिंग बेड नही कोई तोप थी जिससे दिल्ली को उड़ा देते ये खिलाड़ी। ये सरकार की तानाशाही ही है जो खिलाड़ियों के हौंसलों को तोड़ने के लिए बिजली पानी तक सप्लाई बंद कर गई थी।

इस मौन मशाल रैली में प्रमुख रूप से भाग लेने वालों में निशा गुप्ता, काम्या, सरोज यादव,सुनीता यादव, युवा साथी ग्रुप के प्रधान टिंकू दहिया,सतपाल सिंह यादव,मुंडिया खेड़ा, प्रधान, नारनौल गौ सेवा मंडल, राजेश लखेरा,प्रधान, लखेरा समाज, मुकेश वालिया, न्यू टाइगर क्लब, पहलवान बुधराम सैनी, जय सिंह सैनी, गौतम सैनी,समाज सेवी राकेश शर्मा, नारनौल अधिवक्ता चैंबर्स सोसाइटी,प्रधान, यशवीर ढिल्लों, गोकुल दायमा, जगदीश प्रसाद, रिंकू सैनी, सचिन सैनी, विजय चोपड़ा, हरीश सैनी, नागेन्द्र सहित अनेक महिलाएं और पुरुष शामिल थे।

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