
डीपी वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा। dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़ ।
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के नंबर एक विधानसभा क्षेत्र कालका से अंबाला नगर निगम की मेयर श्रीमती शक्ति रानी शर्मा को टिकट देकर कुछ नया करने की कोशिश जरूर की है लेकिन यहां उनके लिए चुनाव चुनौती पूर्ण नजर आ रहा है। श्रीमती शर्मा 2014 में भी कालका से चुनाव लड़ चुकी है लेकिन उस समय उन्होंने अपनी ही पार्टी की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था ।इस समय उनके साथ भारतीय जनता पार्टी का बैनर है कार्यकर्ताओं की टीम है। जहां तक चुनौती का सवाल है अंबाला में मेयर का चुनाव जीतना और श्रीमती शर्मा के पुत्र कार्तिकेय शर्मा का राज्यसभा का चुनाव जीतना कम चुनौतीपूर्ण नहीं था ।अब देखना यह है कि श्रीमती शर्मा का राजनीतिक परिवार कालका की लड़ाई जीतने में किस तरह से कामयाब होता है । अभी यह काम उनके लिए आसान नहीं लग रहा।
इसके कई कारण है। एक तो समय कम है । सब देख रहे हैं कि संबंधित परिवार की पहले इस तरह की कोई तैयारी नहीं थी। भाजपा उम्मीदवार का यहां अब लगभग सीधा ही मुकाबला है। क्योंकि आम आदमी पार्टी का कांग्रेस से गठबंधन होने जा रहा है इससे न केवल कांग्रेस को लाभ होगा बल्कि मत विभाजन से जो लाभ भाजपा को हो सकता था वह नहीं हो पाएगा। दूसरा बड़ा कारण यह है कि प्रदीप चौधरी एक स्थानीय उम्मीदवार हैं जबकि शक्ति रानी को आउटसाइडर बताया जाना मुश्किल नहीं होगा।यद्यपि व्यवहार में कालका पंचकूला की उम्मीदवारी के मामले में चंडीगढ़ रहने वाले व्यक्ति को भी आउटसाइडर नहीं कहा जा सकता और शक्ति रानी शर्मा चंडीगढ़ रहने वाली उम्मीदवार हैं परंतु इसके बावजूद भी कांग्रेस उम्मीदवार को स्थाई होने का लाभ निश्चित तौर पर मिलेगा।

इसके अलावा कालका से विधायक रही लतिका शर्मा बेशक शक्ति रानी के मुकाबले में चुनाव लड़ने की कोशिश में नहीं है परंतु टिकट कट जाने से आहत है। हल्के में उनके समर्थक उनके इशारे पर चलेंगे और वह कम से कम शक्ति रानी की शक्ति देने के पक्ष में बिल्कुल नहीं होंगे। इन सबको अपने पक्ष मत करना शक्ति रानी के लिए सबसे अधिक चुनौती है। शक्ति रानी के मुकाबले में कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप चौधरी हल्के में अपेक्षाकृत सीधा और ज्यादा दखल रखते हैं ।उनका जनता से मेल मिलाप दुख सुख में आना जाना निश्चित तौर पर उनके काम आ सकता है। लेकिन इस मामले में एक बात शक्ति रानी शर्मा के यह काम आ सकती है कि प्रदीप चौधरी इंडियन नेशनल लोक दल से आए उम्मीदवार हैं । कहते हैं कि उनकी ताकत लोकदल ज्यादा है कांग्रेस कम। प्रदीप चौधरी को स्थानीय कांग्रेस नेताओं से वह समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है जो अपेक्षित है। यहां भीतरघात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे सभी लोग अपेक्षित व्यवस्था से भाजपा उम्मीदवार के लिए वरदान साबित हो सकते हैं । कुल मिलाकर चुनाव की मैनेजमेंट शक्ति रानी शर्मा के लिए बहुत ही आवश्यक है जो निर्णायक साबित हो सकती है।यह काम जितना जल्दी और सार्थक तरीके से होगा उतना ही उन्हें लाभ होगा वरना आज के दिन कालका में कांग्रेस के प्रदीप चौधरी मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं।

