लकडि़या में हुआ सहकारी बैंक आपके द्वार का 53वां कार्यक्रम। देश की तरक्की का आधार हैं महिलाएं- नीलम अहलावत।

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दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2022@gmail.com चंडीगढ़ 22 अप्रैल, बेरी। स्थानीय गांव लकडि़या की चौपाल में सहकारी बैंक आपके द्वार के 53वें कार्यक्रम का आयोजन ग्रामिणों द्वारा आयोजित किया गया। ग्रामीणों द्वारा गांव में पहुंचनें पर दी झज्जर केन्द्रीय सहकारी बैंक लि0 की चेयरपर्सन एवं जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक चेयरमैन एसोशिएशन हरियाणा की प्रधान नीलम अहलावत का जोरदार स्वागत किया गया।
चेयरपर्सन नीलम अहलावत नें उपस्थित महिलाओं के अन्दर जोश का प्रवाह करते हुए कहा कि देश की तरक्की का आधार हैं महिलाएं हमारे सैन्य शक्ति को संभालती हुई युद्ध के मैदान में भी महिलायें रानी लक्ष्मीबाई की तरह युद्धाभ्यास में पारंगत हुई है। अब भारतीय सेना में परमानेंट कमिशन का हक महिलाओं को दे दिया है। वह बात अलग है कि यह हक उन्हें बहुत देर से मिला पर गनीमत है कि मिल ही गया। धार्मिक कार्यों में संलग्न महिलायें भी सामाजिक बेडि़यों को तोड़कर धार्मिक कार्यों में लिप्त हो गई है। उन्होंने अपने ज्ञान से आध्यात्मिक क्षेत्र में स्थान पाकर लोगों को जागरूक किया है। जीवन के मूल्यों को समझना और समझाना उनमें संतुलन बनाना आजकल की मानसिक दबाव को झेल रही पीढ़ी को सही दिशा दिखाने में महिलायें आगे बढ़ रही हैं। ब्रह्माकुमारी शिवानी, जया किशोरी आदि इस सूची में शामिल है। मनोरंजन की दुनियाँ में भी महिलायें अपना परचम स्थापित करती हुई नजर आ रही है। महिला कलाकार मनोरंजन की दुनियाँ में अपनी काबिलियत के बल पर अपना नाम कमाया है। जैसे सुष्मिता सेन, विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय, हॉलीवुड तक पहुंचने वाली प्रियंका चोपड़ा, आशा भोंसले यह सभी महिलायें जिनके नाम शामिल हैं। इसी प्रकार 2022 में सरगम कौशल में अनूठी मिसाल पेश की मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर।
महिलायें दिखावे की जन-प्रतिनिधि न बनेगी अब, बल्कि अपनी सक्रिय सहभागिता से पुरुष प्रतिनिधियों से आगे निकल रही है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, प्रगतिशीलता के युग में स्त्री को दूसरी श्रेणी का नागरिक माना जाता है, जबकि ढाई हजार वर्ष पहले ही भगवान महावीर ने स्त्री और पुरुष को समानता की तुला पर आरोहित कर दिया। हमारी संसद में स्त्री के लिए समान पारिश्रमिक के विधेयक स्वतंत्रता के चालीस वर्ष बाद पारित किए गये थे, जबकि स्त्री की रचनात्मक ऊर्जा का उपयोग व्यापक स्तर पर करने की जरूरत है। जिन समुदायों में आज भी स्त्री को हीन और पुरुष को प्रधान माना जाता है और इसी मान्यता के आधार पर परिवार, समाज एवं राष्ट्र के विकास में स्त्री एवं पुरुष की समान हिस्सेदारी नहीं होती, वे समुदाय स्वयं ही अपूर्णता का अनुभव करते होंगे। भारतीय इतिहास महिलाओं की उपलब्धि से भरा पड़ा है। आनंदीबाई गोपालराव जोशी (1865-1887) पहली भारतीय महिला चिकित्सक थीं और संयुक्त राज्य अमेरिका में पश्चिमी चिकित्सा में दो साल की डिग्री के साथ स्नातक होने वाली पहली महिला चिकित्सक रही है। सरोजिनी नायडू ने साहित्य जगत में अपनी छाप छोड़ी। हरियाणा की संतोष यादव ने दो बार माउंट एवरेस्ट फतेह किया। बॉक्सर एमसी मैरी कॉम एक जाना-पहचाना नाम है। हाल के वर्षों में, हमने कई महिलाओं को भारत में शीर्ष पदों पर और बड़े संस्थानों का प्रबंधन करते हुए भी देखा है। कोविड-19 के दौरान कोरोना योद्धाओं के रूप में महिलाओं डाक्टरों, नर्सो, आशा वर्करों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व समाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मरीजों को सेवाएं दी है। कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। भारत बायोटेक की संयुक्त एमडी सुचित्रा एला को स्वदेशी कोविड -19 वैक्सीन कोवैक्सिन विकसित करने में उनकी शानदार भूमिका के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। महिमा दतला, एमडी, बायोलॉजिकल ई, ने 12-18 वर्ष की आयु के लोगों को दी जाने वाली कोविड-19 वैक्सीन विकसित करने के लिए अपनी टीम का नेतृत्व किया। निस्संदेह, महिलायें और लड़कियां समाज में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बदलाव की अग्रदूत हैं। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से महिलाएं न केवल खुद को सशक्त बना रही हैं बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था की मजबुती में को भी योगदान दे रही है। सरकार के निरन्तर लगातार आर्थिक सहयोग से आत्मनिर्भर भारत के संकल्प में उनकी भागीदारी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। पिछले 6-7 वर्षों में महिला स्वयं सहायता समूहों का अभियान और तेज हुआ है। आज देश भर में 70 लाख स्वयं सहायता समूह हैं। महिलाओं के पराक्रम को समझने की जरूरत है, जो हमें महिमा की अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। आइए हम उन्हें आगे बढ़ने और फलने-फूलने में मदद करें। महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए अमृत काल इन्हें समर्पित हो। दी झज्जर केन्द्रीय सहकारी बैंक लि0 के द्वारा नाबार्ड के सौजन्य से महिलाओं को संयुक्त देयता समूह (ज्वांईट लाईविलिटी ग्रुप) की संरचना कर उन्हें पचास हजार तक की धनराशि उन्हें काम शुरु करने के लिए दी जाएगी। जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के क्षेत्र में एक अनूठा कदम है।
इस अवसर पर रामकुमार, सहदेव, सुनिल, महताब, जसबीर, अजय कुमार, नीरज, महासिंह, जगबीर, संदीप, कर्मबीर, काफी, सविता, राजरानी, प्रोमिला, कुलवंती, विद्या, सुनिता, संगीता, विद्या, अनिता, सुशीला, ज्योति, अंजू, पूजा, रोशनी, मोनिका, सरोज एवं लक्ष्मी आदि मौजूद रहे।
सभा को संबोधित करते नीलम अहलावत

सभा को संबोधित करते नीलम अहलावत

गांव में महिलाओं के बीच में नीलम अहलावत

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