रोहतक में अरविंद की जगह ले सकते हैं रणदीप। अरविंद के लिए दो विकल्प करनाल और सोनीपत। लोकसभा नहीं तो विधानसभा ! पिता की जगह आरती राव गुरुग्राम से हो सकती है भाजपा प्रत्याशी !

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धर्मपाल वर्मा

दक्ष दर्पण समाचार सेवा

(पॉलिटिकल डेस्क)

चंडीगढ़ ।
भारतीय जनता पार्टी के नेता बहुत कैलकुलेटर तरीके से काम करते हैं। रोहतक की लोकसभा सीट को लेकर उनका तथाकथित नजरिया बहुत ही कारगर साबित हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि रोहतक को लेकर भाजपा एक साथ कई संभावनाओं और व्यवस्थाओं पर विचार कर रही है। सबसे पहला विचार कि चुनाव के आरंभ में ही यह प्रचार शुरू हो जाए कि रोहतक में ही कांग्रेस की जीत पक्की नहीं है या रोहतक भी बीजेपी जीत रही है। ऐसा इसलिए कि उसके बाद लोग यह कहना शुरू कर देंगे कि कांग्रेस रोहतक में ही हार रही है तो दे दाल में पानी फिर तो भाजपा की 10 की 10 सीट ही है आनी। दूसरा यह है कि डॉक्टर अरविंद शर्मा को लेकर पार्टी के कई महत्वपूर्ण नेता कई कारणों से नाराज हैं। यदि रोहतक से डॉक्टर अरविंद शर्मा की टिकट काट दी जाए तो स्थिति नॉर्मल हो सकती है फिर चाहे उन्हें और कहीं से टिकट दे दी जाए कोई दिक्कत नहीं। तीसरा यह कि पार्टी में यह भी माना जा रहा है कि अब गैर जाट मतदाता कांग्रेस की ओर जाने वाला नहीं है वह तो कमाल के फूल पर ही वोट डालेगा ।ऐसे में उम्मीदवार जाट हो तो कांग्रेस की तरफ जाने वाले जाट मतदाताओं में सेंध लगने के आसार बने रहेंगे। यही रोहतक में कांग्रेस उम्मीदवार की हार का कारण बन सकता है। राजनीतिक तौर पर यह आकलन भी हुआ है कि प्रदेश में जाटों की स्थिति कुछ इस तरह की है कि उनकी भाजपा में एंट्री कैसे हो या भाजपा को हराए कैसे!
भाजपा ने यह भी पता लगा लिया है कि प्रदेश के जाट मतदाताओं में एक नई सोच यह भी उभरी है कि वह जाट उम्मीदवारों को जीताने के पक्ष में सोचने लगे हैं मतलब यह है कि जाट चाहे बीजेपी की टिकट पर भी है और जीतने की स्थिति में है तो उसी को बना कर लाओ। ऐसे में यह लाभ रोहतक के ही बेटे फिल्म स्टार रणदीप हुड्डा को मिल सकता है। वह न केवल जाट है बल्कि हुड्डा भी हैं। लोकल भी है। एक व्यवहारिक विचार यह भी इन राजनीतिकों के मन मस्तिष्क में है कि यदि लकड़ी काटनी हो तो कुल्हाड़ी की जरूरत पड़ती है और उसे कुल्हाड़ी में हत्या या बेटा लकड़ी का ही डालना होता है तभी वह लकड़ी को काटने में सफल हो पाती है शायद रोहतक में भारतीय जनता पार्टी इन्हीं विचारों पर काम कर रही है। इसके अलावा यह विचार भी काम कर रहा है कि टिकट काट दी गई तो डॉक्टर अरविंद शर्मा की इनकंबेंसी का नुकसान भाजपा को नहीं होगा। पार्टी ने यह महसूस किया है कि डॉ अरविंद शर्मा की एक स्टेटमेंट से वह जाट भी नाराज हैं जो भाजपा को वोट देने को तैयार रहते हैं।
अब बात करें डॉक्टर अरविंद शर्मा कि पार्टी के नेता डॉ अरविंद शर्मा को सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़ा सकते हैं यहां पार्टी मौजूदा सांसद रमेश चंद्र कौशिक को रिप्लेस करने की जरूरत महसूस कर रही है। डॉ अरविंद शर्मा 1996 में सोनीपत से भी सांसद रह चुके हैं उसमें वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सफल हुए थे।
इसके अलावा डॉक्टर शर्मा करनाल लोकसभा क्षेत्र से भी भाजपा के प्रत्याशी हो सकते हैं वह उसे स्थिति में जब मौजूदा सांसद संजय भाटिया लोकसभा का चुनाव न लड़े। पार्टी डॉक्टर अरविंद शर्मा को रोहतक से टिकट नहीं देना चाहती उन्हें भविष्य में लोकसभा का टिकट न भी मिले तो पार्टी उन्हें विधानसभा का चुनाव भी लड़ा सकती है। डॉ अरविंद शर्मा ने 2014 में बहुजन समाज पार्टी की टिकट पर जुलाना और यमुनानगर दोनों जगह सस विधानसभा के चुनाव लड़े थे। वैसे डॉक्टर अरविंद शर्मा के बारे में यह करने वाले लोग भी काम नहीं है कि डॉक्टर अरविंद शर्मा करनाल से भाजपा नहीं तो कांग्रेस से भी उम्मीदवार हो सकते हैं।

महेंद्रगढ़ भिवानी को लेकर भी भाजपा की सोच यह है कि यहां भी जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए। दो प्रमुख उम्मीदवार हैं एक है ओमप्रकाश धनखड़ दूसरे दादरी के विधायक सोमवीर सांगवान। यह समझ कर चलिए कि भारतीय जनता पार्टी ने भिवानी से सांसद धर्मवीर की टिकट काट दी है। हरियाणा में भाजपा की तीन सीटें ऐसी हैं जहां उम्मीदवारों को लेकर कोई ज्यादा सवाल खड़े नहीं हो रहे ।एक फरीदाबाद जहां कृष्णपाल गुर्जर का चुनाव लड़ना लगभग तय है दो कुरुक्षेत्र जहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नायब सैनी का चुनाव लड़ना पक्का है और एक गुरुग्राम जहां राव इंद्रजीत सिंह या उनकी बेटी आरती राव का चुनाव लड़ना लगभग तय है। सिरसा और अंबाला की रिजर्व सीटों की बात करें तो यह कांग्रेस पार्टी के सिरसा के उम्मीदवार के नाम पर अटका हुआ है ।ऐसा माना जा रहा है कि सिरसा से कुमारी शैलजा कांग्रेस की प्रत्याशी हुई तो भारतीय जनता पार्टी उनके मुकाबले सुनीता दुग्गल को कमजोर मानकर डॉक्टर अशोक तंवर को मैदान में उतर सकती है। सुनीता दुग्गल चुनाव नहीं लड़ी तो उनकी जगह पूर्व विधायक रविंद्र बलियाली भी उम्मीदवार हो सकते हैं। अंबाला में बंतो कटारिया की टिकट तभी कट सकती है जब भारतीय जनता पार्टी को सिरसा में किसी रविदासी उम्मीदवार को मैदान में उतरना पड़ा क्योंकि पार्टी ने पिछले चुनाव में भी रविदासी और गैर रविदासी उम्मीदवार का बैलेंस बनाया था।

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